इसके लिए बच्चे हर साल 1.38 लाख रुपये समिति को देते हैं, जहां से यह पैसा किराये के तौर पर भवन मालिक को दे दिया जाता है। निजी स्कूलों की तर्ज पर खर्चीली साबित हो रही इस सरकारी स्कूल की शिक्षा का हाल मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, वन एवं परिवहन मंत्री से भी बयान किया जा चुका है।
लेकिन आश्वासन से अधिक किसी ने सुध नहीं ली। समिति सदस्याें के अनुसार वे वर्ष 2007 से इस समस्या को तकरीबन हर मंच पर उठा चुके हैं। स्कूल प्रबंधन समिति ने सभी अभिभावकों की सहमति से हलाण-1 गांव में दो भवनों में पांच कमरे किराये पर लिए हैं।
इसमें एक भवन में दो कमरे हैं, जिसका किराया तीन हजार प्रतिमाह के हिसाब से सालाना 36 हजार रुपये बनता है। दूसरे भवन में तीन कमरों को सालाना 72 हजार रुपये किराया दे रहे हैं।
स्कूल में खेल मैदान न होने से छात्रों की प्रार्थना सभा व खेलने के लिए एक खेत किराये पर लिया है। इसका किराया सालाना 30 हजार रुपये दिया जा रहा है। यह सब पैसा स्कूल प्रबंधन समिति यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले 133 विद्यार्थियों से वसूल करती है।
एसएमसी के अध्यक्ष अनूप राम, कृष्ण लाल, भीर चंद, मनी राम तथा लाल चंद, अभिभावक हुकम, छपे राम, तारा चंद, विकास कमेटी हलाण-1 के अध्यक्ष जगरनाथ, दुनी चंद मेहर चंद, मोहन लाल, काका राम, गुप्त राम, केहर सिंह, देव राज, अमर चंद, रोशन लाल, योग राज, मीरा देवी, मोहनी देवी, सरला देवी
तथा ओम प्रकाश ने कहा कि 12 सालों से उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वे मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व स्थानीय विधायक एवं वन मंत्री से इस मांग को रख चुके हैं।
मामला ध्यान में है। भवन निर्माण के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था की जा रही है। जल्द ही इसके टेंडर करवा कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-गोविंद सिंह ठाकुर, वन, परिवहन एवं खेल मंत्री
शिक्षा विभाग ने भवन निर्माण के लिए बजट भी जारी कर दिया है। भवन बनने वाली जगह को भी विभाग के नाम स्थानांतरित कर दिया है। लेकिन लोनिवि अभी तक स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पाया है।ऐसे में लोनिवि के कार्यप्रणाली भी सवाल उठ रहे हैं।
किराये पर लिए तीन कमरों को मकान मालिक ने अक्तूबर के बाद खाली करने को कहा है। एसएमसी के अध्यक्ष अनूप राम ने कहा कि उनका भवन मालिक से अक्तूबर माह तक एग्रीमेंट हुआ है।इसके बाद किराया 1.20 लाख देने या फिर कमरों को खाली करने को कहा है। वर्तमान में इसका किराया करीब 72 हजार सालाना दिया जा रहा है।