तत्कालीन सरकार के एक मंत्री ने इस मंजूरी के लिए यूओ नोट जारी किया। इसके बाद मामला वित्तायुक्त राजस्व के पास पहुंचा। इस पर सीधे मंजूरी देने के बजाय वित्तायुक्त राजस्व ने कसौली में कैरिंग कै पेसिटी पर रिपोर्ट के लिए डीसी को चिट्ठी लिखी। मामला उलझा रहा तो मंत्री का दूसरा यूओ नोट आ गया।
उस समय प्रधान सचिव राजस्व पी मित्रा ही थे। इस यूओ नोट के बाद प्रधान सचिव ने फाइल आगे मंत्री को ही भेज दी। फिर सरकार की मंजूरी आने के बाद धारा -118 की यह मंजूरी दी गई।
इसी मामले में संबंधित व्यवसायी ने पी मित्रा से फोन पर बात की। इस बातचीत को राज्य सरकार की खुफिया एजेंसी ने एक अन्य मामले की छानबीन के दौरान रिकॉर्ड कर दिया। यह बातचीत सीडी के रूप में है।
इसी सीडी को अवैध लेनदेन की जांच आगे बढ़ाने को आधार बनाया गया है। अब यूओ नोट इसके सहयोगी दस्तावेज बन गए हैं। आने वाले दिनों में विजिलेंस ब्यूरो इससे संबंधित कई अन्य तथ्य एकत्र कर कुछ अन्य गण्यमान्य लोगों पर शिकंजा कस सकता है।