लिहाजा, स्कूली बच्चे उफनती नदी को पार करने के लिए विवश हैं। इससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय नेताओं के खिलाफ भी लोग आक्रोशित हैं। क्यारी गांव के अभिभावकों को स्कूल के बच्चों को गिरि नदी पार करवाने खुद जाना पड़ रहा है।
ग्रामीण सुरेश, मदन शर्मा, विनोद शर्मा, रमेश अत्री, बृजेश अत्री आदि ने बताया कि बरसात के दो महीने बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों का जीवन पटरी पर नहीं लौटा है। एक गांव का दूसरे गांव से संपर्क कट गया है।
ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस बार उनके हित में कार्य नहीं किया गया तो ग्रामीण हर चुनाव का बहिष्कार करेंगे। उधर, अध्यापक मदन अत्री और बृजेश अत्री ने बताया कि बरसात के समय गांव में कहीं और भी पैदल तक का रास्ता नहीं है।
एक गांव से दूसरे गांव तक जाने के रास्ते ग्रामीणों ने स्वयं अपने पैसे और श्रमदान कर बनाए हैं। ग्रामीण सुरेश ने बताया कि बरसात के मौसम में चिंता रहती है कि सभी कुशलपूर्वक घर वापस आएंगे या नहीं। किसी भी सरकार ने उनके बारे में नहीं सोचा।
अब हर राजनीतिक दल से उनका मोह भंग हो चुका है। रेणुका के विधायक विनय कुमार ने बताया कि फुटब्रिज का कोई प्रपोजल नहीं है। अलबत्ता बनैत से चांदनी पुल बनाने को विधायक प्राथमिकता में डाला गया है। डडुवा कइला से फुटब्रिज की मांग को भी पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।