छात्र-अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शिक्षा निदेशालय के बाहर प्रदर्शन किया। दो घंटे तक किए गए इस प्रदर्शन में मंच ने प्रदेश सरकार से मांग उठाई कि निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए जल्द कानून लाया जाए। स्कूलों के लिए रेगुलेटरी कमीशन का गठन किया जाए। प्रदर्शन के बाद अतिरिक्त निदेशक उच्च शिक्षा नीरज गुप्ता को मांग पत्र भी सौंपा। मंच के नेताओं ने चेताया कि यदि निजी स्कूलों की मनमानी नहीं रोकी गई तो प्रदेश भर में आंदोलन किया जाएगा। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि सरकार की ढील के कारण कई निजी स्कूल मनमानी पर उतर आए हैं।
कोरोना काल में भी स्कूलों ने ट्यूशन फीस के साथ एनुअल चार्जेज, कंप्यूटर फीस, स्मार्ट क्लास रूम, मिसलेनियस केयर, स्पोर्ट्स, मेंटेनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिल्डिंग फं ड, ट्रांसपोर्ट औक अन्य हर तरह के फंड की वसूली की है। जबकि ये सेवाएं छात्रों को दी ही नहीं गई। स्कूलों ने 2021 में कुल फीस के अस्सी प्रतिशत से ज़्यादा हिस्से को ट्यूशन फीस में बदलकर वसूला। जो अभिभावक रोजगार छिन जाने के कारण फीस नहीं दे पर रहे, उनकी मानसिक प्रताड़ना की जा रही है, उनसे हर दिन उनसे सौ रुपये लेट फीस तक वसूली जा रही है, ऑनलाइन क्लास से बाहर तक करने की धमकी दी जा रही है
उच्च न्यायालय, विभाग के आदेशों की हो रही अनदेखी
मंच का मानना है कि 2014 के मानव संसाधन विकास मंत्रालय और 5 दिसम्बर 2019 के शिक्षा विभाग के दिशा निर्देशों का निजी स्कूल खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। फीस तय करने को अभिभावकों की आम सभा की भूमिका दरकिनार की गई है। प्रदर्शन में विवेक कश्यप, बालक राम, दलीप कुमार, राम प्रकाश, प्रताप, रेखा चौहान, अनु, पूनम, रेखा ठाकुर, सुषमा चौहान, संतोष, भावना, अनीता, नीतू, इंदु, सपना, प्रीति सोनी, रेशमा रानी, निक्की मेहता, रवि मौजूद रहे।