साल 2012 से 2017 के दौरान प्रदेश में 417 नए स्कूल-कॉलेज खुले। 2012 में शिक्षण संस्थानों की कुल संख्या जहां 15136 थी, वहीं 2017 में यह संख्या बढ़कर 15553 पहुंच गई है। 2012 में 10542 प्राइमरी स्कूल थे। कांग्रेस सरकार ने स्कूलों की संख्या बढ़ाकर 10725 तक पहुंचा दी है। इसी तरह 71 कॉलेजों की संख्या को बढ़ाकर 113 कर दिया है।
1.17 लाख विद्यार्थियों ने छोड़े सरकारी स्कूल
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में साल दर साल बच्चों की संख्या कम होती जा रही है। पिछले चार सालों में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1 लाख 17 हजार 554 छात्र कम हुए हैं। वर्ष 2013-14 में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 10,07,196 थी। वर्ष 2014-15 में घटकर 9,59,147 रह गई। शैक्षणिक सत्र 2017 तक यह संख्या घटकर 8,89,642 रह गई।
प्रदेश में कितने स्कूल
प्राइमरी स्कूल: 10,725
मिडल स्कूल: 2066
सीनियर सेकेंडरी स्कूल: 2648
कुल सरकारी स्कूल: 15,439
- 1021 प्राइमरी और 193 मिडल स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक तैनात। 6741 प्राइमरी और 344 मिडल स्कूलों में सिर्फ दो-दो शिक्षकों को सौंपा गया है पांच-पांच कक्षाएं पढ़ाने का जिम्मा।
- 304 प्राइमरी स्कूल और 250 अपर प्राइमरी स्कूल एक-एक कमरे में चल रहे हैं। 2449 प्राइमरी और 226 अपर प्राइमरी स्कूल दो-दो कमरों में चल रहे हैं।
- बोर्ड परीक्षाओं में मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों में सरकारी स्कूल पिछड़े। बीते साल दसवीं की वार्षिक परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों से सिर्फ एक विद्यार्थी मेरिट में स्थान प्राप्त कर सका।
- एनसीईआरटी सहित अन्य एजेंसियों के माध्यम से किए जाने वाले एजूकेशन सर्वे में प्रदेश के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों का परिणाम लगातार कम आ रहा है।
- परीक्षा परिणाम नहीं देने वाले शिक्षकों की सरकार ने कोई भी जवाबदेही तय नहीं की है। हर साल परिणाम खराब आने पर सरकार कार्रवाई की धमकियां देती है लेकिन कुछ समय बाद मामला फाइलों में बंद हो जाता है।
- सरकारी स्कूलों के कई शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाने में दिलचस्पी लेने से ज्यादा अपने तबादले करवाने या संगठन की राजनीति में उलझे रहते हैं। ऐसे शिक्षक निदेशालय या सचिवालय के आसपास ही मिलते हैं।
- पहली से आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को कक्षा में फेल नहीं करने की नीति केंद्र सरकार ने शुरू की है। इस नीति की आड़ में कई शिक्षक विद्यार्र्थियों की ओर पूरा ध्यान नहीं देते।
- शिक्षकों के ऑनलाइन तबादले करने को एक्ट बनाया जाएगा।
- कलस्टर विश्वविद्यालय मंडी को शुरू किया जाएगा।
- निजी स्कूलों की मनमानी रोकते हुए हुए इन्हें आयोग के दायरे में लाया जाएगा।
- हायर एजूकेशन काउंसिल का गठन कर बिल तैयार किया जाएगा।
- प्रारंभिक स्कूलों में घटती विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को विशेष प्रयास होंगे।
- स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को बायोमीट्रिक मशीनें लगेंगी।
कांग्रेस सरकार के समय शिक्षा के क्षेत्र की खासी दुर्गति हुई है। राजनीति से प्रेरित होकर बिना बजट प्रावधान के स्कूल-कॉलेज खोले गए। गुणात्मक शिक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया गया। भाजपा सरकार ने इन सभी मामलों को गंभीरता से लिया है।
सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। बजट में इन योजनाओं का उल्लेख होगा। प्रदेश की जनता जल्द ही इसकी साक्षी बनेगी कि किस प्रकार से सरकारी स्कूलों ने अपना गौरव दोबारा प्राप्त किया है। - सुरेश भारद्वाज, शिक्षा मंत्री हिमाचल सरकार