हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल ने जीएसटी में प्रावधानों पर ऐतराज जताते हुए भारतीय उद्योग-व्यापार मंडल के राष्ट्रव्यापी भारत बंद के समर्थन का एलान किया है। व्यापार मंडल ने इसी क्रम में 30 जून को प्रदेश के सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद रखने का फैसला किया है। व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष सुमेश शर्मा ने सोमवार को यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि व्यापारी जीएसटी लागू होने और टैक्स देने के खिलाफ नहीं हैं।
सरकार इसे आनन-फानन में लागू कर रही है। जीएसटी में कई प्रावधानों पर देशभर के व्यापारी आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी में कोताही पर व्यापारी को सजा का प्रावधान पूरी तरह गलत है। इसे तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने जीएसटी के तहत व्यापारियों को छूट के लिए टर्न ओवर की सीमा में हिमाचल और पंजाब राज्यों में भेदभाव पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 10 लाख रुपये से कम टर्न ओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी की प्रक्रिया के तहत पंजीकरण से छूट मिलेगी जबकि पंजाब में इस सीमा को 20 लाख रुपये रखा गया है। उन्होंने ई-वे बिल को समाप्त करने और एक माह में तीन रिटर्नों के स्थान पर तीन माह में एक रिटर्न भरने का प्रावधान करने की मांग की।
सुमेश शर्मा ने कहा कि यदि कोई विक्रेता व्यापारी जीएसटी जमा न करवाए तो दुकानदार को जीएसटी जमा करवाने की जवाबदेही से मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने एक सूत्रीय सरल जीएसटी कर की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन रिटर्न की बाध्यता को खत्म किया जाए।
कपड़ा, ब्रांडेड अनाज, तिलहन, कृषि उत्पादों, जीवन रक्षक वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए। जीएसटी के तहत कोई भी वस्तु फ्री नहीं रहेगी, हर वस्तु पर टैक्स देना पड़ेेगा। ग्राहकों को एक्सचेंज व ट्रांसफर रिप्लेसमेंट सुविधाएं खत्म हो जाएंगी। जीएसटी के तहत प्रत्येक बिल को ऑनलाइन अपडेट करना होगा और रिकॉर्ड मेंटेन करना होगा। हर खरीद का दैनिक रिकॉर्ड रखना होगा।
विश्वास में नहीं लिए व्यापारी
सुमेश ने आरोप जड़ा कि जीएसटी को लागू करते समय कारोबारियों को विश्वास में नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसे लागू करते समय सरकार व्यापारी वर्ग को विश्वास में ले अन्यथा व्यापारी समुदाय को संघर्ष की राह अपनानी पड़ेगी। इस मौके पर व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव राकेश कैलाश, रविंद्र अरोड़ा, इकबाल सिंह व अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।