ऐसे में शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में जाकर मशीनों की जांच करवाने का फैसला लिया है। जिला उपनिदेशकों को मशीनें लगाने वाली कंपनी के तकनीकी स्टाफ को साथ लेकर जांच करने के आदेश दिए हैं।
उधर, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की बायोमीट्रिक मशीनों से हाजिरी लगाने की मुहिम सिरे नहीं चढ़ रही है। बीते दो साल से चल रही 2700 मशीनों की खरीद फाइलों में बंद होकर रह गई है।
शिक्षा निदेशालय मशीनों की खरीद के लिए स्टेट इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन को बजट जारी कर चुका है। बावजूद इसके अभी तक खरीद की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि अब चौथी बार कारपोरेशन ने मशीनों की खरीद की प्रक्रिया शुरू की है।