कुछ मामलों में संबंधित संस्थाओं के उप नियमों में लगातार कार्यकाल की सीमा निर्धारित होने के बावजूद कर्मचारी एक अंतराल के बाद दोबारा चुनाव लड़कर पद हासिल कर लेते हैं। वहीं, कुछ मामलों में अपने परिवार के सदस्य या निकट संबंधी को प्रतिनिधि के रूप में चुनाव जिताकर परोक्ष रूप से संस्था पर नियंत्रण बनाए रखने की शिकायतें भी सामने आई हैं। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार लंबे समय तक चुनावी पदों पर बने रहने से संबंधित कर्मचारी अपने शासकीय दायित्वों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। इससे उनके कार्य निष्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही यह आशंका भी उत्पन्न होती है कि विशेषकर वे संस्थाएं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी हैं, उनमें पद पर बने रहने वाले कर्मचारियों के निजी हित विकसित हो सकते हैं।
सचिवालय में भी नहीं हो रहा इन आदेशों का पालन
इन आदेशों का पालन राज्य सचिवालय में भी नहीं हो रहा है। विभागों और फील्ड स्टाफ के बीच भी ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है। सचिवालय से जुड़े संगठनों जैसे राजपत्रित कर्मचारी संघ, सचिवालय चालक एसोसिएशन, स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड तथा क्लास-थ्री और क्लास-फोर कर्मचारियों के संगठनों में पदाधिकारी 20–25 वर्षों से बार-बार चुनाव लड़कर चुने जा रहे हैं और लंबे समय से पदों पर काबिज हैं।
प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों, निगमों को कड़े निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों, निगमों और स्वायत्त निकायों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा कर निर्धारित सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि दो कार्यकाल या पांच वर्ष की अधिकतम सीमा का उल्लंघन करने, बिना पूर्व अनुमति चुनाव लड़ने अथवा नियमों को दरकिनार कर परोक्ष रूप से पद पर बने रहने के मामलों में संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसे प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और हितों के टकराव को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।