आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवन की ओर से गुड़िया हत्याकांड मामले में आईजी जहूर जैदी पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाने के बाद हिमाचल की सियासत में हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करेगी जो गुड़िया केस के गवाहों पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं।
कांगड़ा में गुड़िया मामले पर प्रश्न के उत्तर में सीएम ने कहा कि हम कोर्ट के आदेशों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन इस मामले में अगर किसी ने सुबूतों और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया तो यह बर्दाश्त नहीं होगा। सीएम से पूछा गया कि आईपीएस अधिकारी सौम्या ने क्या आपको आईजी जैदी से दबाव मिलने के बारे में बताया था। इस पर सीएम ने कहा कि आईपीएस अधिकारी सौम्या ने डीजीपी को इस संदर्भ में जानकारी दी थी।
इसके बाद डीजीपी ने मुझे जानकारी दी थी। डीजीपी ने आईजी को चेतावनी दी थी। मेरी जानकारी के अनुसार इसके बाद आईजी ने अफसर को फोन करना बंद कर दिया था। अब फिर से यह मामला सामने आया है इसलिए इस संबंध में कड़ा संज्ञान लिया जाएगा। आईजी जैदी को बहाल करने के मामले में सीएम ने कहा कि गुड़िया मामले में संबंधित अधिकारी लगातार तीन बार सस्पेंड किए गए। नियमों के तहत ही उन्हें फिर से नियुक्ति दी गई।
गौरतलब है कि सौम्या मंडी जिला के पंडोह में आईआरबी तीन की कंमांडेट हैं। बुधवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवन ने सीबीआई कोर्ट चंडीगढ़ में गुड़िया मामले में बतौर गवाह बयान दिया। कोर्ट में सौम्या ने कहा है कि आईजी रैंक के अधिकारी जहूर जैदी ने उस पर कोर्ट में बयान बदलने का दबाव डाला था।
सौम्या के इस बयान के बाद सीबीआई कोर्ट ने हिमाचल के डीजीपी को आईजी के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। गुड़िया कांड के बाद सौम्या शिमला में बतौर एसपी तैनात थीं। इस मामले में सौम्या को गवाह बनाया गया था।