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एक मंत्री के महकमे ने दूसरे मंत्री के निगम को दिया बड़ा झटका

Tue, 07 Aug 2018 11:13 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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जयराम कैबिनेट में वरिष्ठता में पहले नंबर के मंत्री महेंद्र सिंह के महकमे ने दूसरे नंबर के वरिष्ठ मंत्री किशन कपूर के निगम को झटका दिया है। महेंद्र सिंह ने किशन कपूर के निगम को यह झटका अपने विभाग की बचत करवाने के लिए दिया है। एक मंत्री के विभाग की बचत होगी तो दूसरे मंत्री के निगम की कमाई घटेगी।

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नतीजतन, आईपीएच महकमे की सालाना 50 लाख से लेकर एक करोड़ की बचत होगी तो खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम को इतना ही नुकसान होगा। महेंद्र सिंह के पास आईपीएच विभाग के साथ बागवानी महकमा भी है। हर साल आईपीएच विभाग पाइपों की खरीद और ढुलाई खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति महकमे से करवाता रहा है। यह महकमा मंत्री किशन कपूर के पास है। 

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पाइप ढुलाई का अब दो के बजाय डेढ़ फीसदी कमीशन देगा आईपीएच विभाग

कुछ महीने पहले पहली बार महेंद्र सिंह ने फैसला लिया कि आगे से इन पाइपों की ढुलाई किसी दूसरे मंत्री के अधीन चल रहे निगम के बजाय क्यों न उनके अपने ही बागवानी विभाग से संबद्ध हिम एग्रो कॉरपोरेशन से करवाई जाए। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम से यह ढुलाई वापस ले ली गई और हिम एग्रो को दी गई।

ढुलाई कमीशन भी दो प्रतिशत से घटाकर डेढ़ फीसदी की गई, जिससे आईपीएच विभाग की 50 लाख से एक करोड़ तक सालाना बचत हो सके। इस पर किशन कपूर के  निगम में हायतौबा मच गई। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव के कार्यालय पहुंचा। मुख्य सचिव ने उच्च अधिकारियों की बैठक ली। चर्चा हुई कि पहले भी विवादित रह चुके हिम एग्रो की माली हालत पतली है।
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अड़ गए आईपीएच मंत्री

पेयजल आपूर्ति पर सरकार को पहले ही परेशानी हो चुकी है। अब कोई जोखिम उठाना ठीक नहीं। नागरिक आपूर्ति निगम से ही पूर्ववत दो फीसदी कमीशन पर खरीद करवाना सही रहेगा। इसके बाद आईपीएच मंत्री अड़ गए कि दो फीसदी नहीं, केवल डेढ़ फीसदी कमीशन दिया जाएगा।

मंत्री किशन कपूर के नियंत्रण के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम को यह शर्त माननी पड़ी। अब इसे साल का 50 लाख रुपये से एक करोड़ तक का घाटा होगा। आईपीएच विभाग हर साल करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये की पाइपों की खरीद करता है।  

हमें पाइपों की ढुलाई का कमीशन घटाना पड़ा है। इसे दो से घटाकर डेढ़ फीसदी करना पड़ा है। यह सही है कि हमें इसका घाटा होगा, मगर हर साल पाइपों की खरीद के बढ़ जाने से कहीं न कहीं इसकी क्षतिपूर्ति भी हो जाएगी। - एसएस गुलेरिया, प्रबंध निदेशक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम
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