मां सरस्वती की मूर्ति भी की गई है स्थापित संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के कालीबाड़ी मंदिर में बुधवार को ढोल-नगाड़े के साथ मां दुर्गा की मूर्तियों की स्थापना की गई।
देर शाम कालीबाड़ी हॉल में मां दुर्गा को आमंत्रित कर मूर्तियों में अधिवास करवाया गया। इसके बाद विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा और आरती हुई। मंदिर में सुबह 7:31 बजे से पहले मां दुर्गा की महाषष्ठी पूजा की गई। दोपहर 12:30 बजे आरती हुई। मां के दरबार में भक्तों का भी तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने महाकाली को चुनरी और प्रसाद चढ़ाया। इसके साथ ही भक्तों ने मंदिर में विशेष पूजा करवाई। आरती के बाद कालीबाड़ी हॉल में मां दुर्गा मूर्तियों की स्थापना की गई।
सबसे पहले भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित किया गया। इसके बाद मां लक्ष्मी, मां दुर्गा, मां सरस्वती और भगवान कार्तिके को विराजित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने मूर्तियों में अस्त्र-शस्त्र देकर फूल मालाएं पहनाई। शाम 7:00 बजे के बाद मां दुर्गा का आह्वान किया गया। इसके साथ ही मां दुर्गा को आमंत्रित कर मूर्तियों में अधिवास करवाया गया। मंदिर के पुजारी पंडित अम्लान गोस्वामी ने बताया कि नवरात्र पर दुर्गा मूर्तियों की स्थापना कर मां दुर्गा अपने मायके पधारती हैं। कहा कि मंदिर में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, माता सरस्वती, माता लक्ष्मी और कार्तिके की मूर्ति भी स्थापित की है। बताया कि विघ्न दूर करने के लिए भगवान गणेश, धन धान्य के लिए मां लक्ष्मी, ज्ञान के लिए मां सरस्वती और मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान कार्तिके को आमंत्रित किया है। वीरवार को मां दुर्गा की महासप्तमी की पूजा की जाएगी। सुबह 7:23 बजे मां दुर्गा का नव पत्रिका में प्रवेश होगा। बिल्व के पौधे में मां दुर्गा का आह्वान किया था। बिल्व के पौधे की एक डाली को काटकर मां दुर्गा की मूर्ति में लगाया जाएगा। नव पत्रिका यानि नौ पौधों में प्रवेश के साथ ही मां दुर्गा का पूजन शुरू होगा। पूजा कर मां दुर्गा को पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद भोग और आरती होगी। श्रद्धालुओं में मां दुर्गा का प्रसाद बांटा जाएगा। शाम 7:00 बजे मां दुर्गा की संध्या आरती होगी।