प्रदेश की सीमा से लगते पीजीआई सहित चंडीगढ़ के छह सेक्टरों पर हिमाचल का अधिकार बनता है। उन्होंने सरकार को यह मांग 14 अप्रैल से पहले केंद्र सरकार से उठाने का अल्टीमेटम दिया। कहा कि सरकार ने इस मांग की अनदेखी की तो पूरे प्रदेश में हिमाचल दिवस से संघर्ष शुरू किया जाएगा।
पूर्व सांसद और हिमाचल रीजनल एलायंस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजन सुशांत ने कहा कि पंजाब और हरियाणा सरकार की तर्ज पर प्रदेश सरकार को भी केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ पर अपना हक जताने के लिए एक सप्ताह में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। प्रदेश की सीमा से लगते पीजीआई सहित चंडीगढ़ के छह सेक्टरों पर हिमाचल का अधिकार बनता है। उन्होंने सरकार को यह मांग 14 अप्रैल से पहले केंद्र सरकार से उठाने का अल्टीमेटम दिया। कहा कि सरकार ने इस मांग की अनदेखी की तो पूरे प्रदेश में हिमाचल दिवस से संघर्ष शुरू किया जाएगा। प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ जल्द इस बाबत बैठक करेंगे।
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पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के हिमाचल आने से पहले पूर्व सांसद डॉ. राजन सुशांत ने सोमवार को प्रेस क्लब शिमला में प्रेस वार्ता में कहा कि पंजाब सरकार चंडीगढ़ पर हक जताने के लिए प्रस्ताव पारित कर चुकी है। मंगलवार को हरियाणा में इस बाबत विशेष सत्र होगा। बीबीएमबी, शानन और चंडीगढ़ में हिस्सेदारी और अपने हक की आवाज न उठाने को लेकर पूर्व सांसद डॉ. राजन सुशांत ने प्रदेश के सभी मुख्यमंत्रियों और सरकारों को कटघरे में खड़ा किया।
उन्होंने सभी को पंगु और मूर्ख तक कह डाला। सुशांत ने कहा कि एक नवंबर, 1966 को पंजाब का पुनर्गठन हुआ और हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ। इसका पुनर्गठन भाषा और भौगोलिक आधार पर किया गया था। उन्होंने परि संपत्तियों के बंटवारे को लेकर पंजाब एक्ट की पूरी जानकारी प्राप्त कर ली है। पंजाब और हरियाणा को चंडीगढ़ नहीं दिया जाना चाहिए। इसे केंद्र शासित प्रदेश ही बनाए रखना चाहिए। दोनों राज्यों की अपनी-अलग राजधानी बननी चाहिए। हिमाचल का चंडीगढ़ पर 7.19 फीसदी अधिकार बनता है। बीबीएमबी में हिमाचल का सदस्य होना चाहिए।