सोमवार को एक मरीज का प्रोस्टेट कैंसर और दूसरे का किडनी ट्यूमर का उपचार किया गया। सर्जिकल टीम का नेतृत्व पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (यूरोलॉजी), डॉ. अनंत कुमार (एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ) ने किया। टीम में विभागाध्यक्ष डॉ. पम्पोष रैना और सहायक प्रोफेसर डॉ. पवन कौंडल शामिल रहे। मरीजों को एक सप्ताह पहले भर्ती कर प्री ऑपरेटिव जांच और एनेस्थीसिया मूल्यांकन किया गया। पहली सर्जरी सुबह 9:30 बजे शुरू होकर 1:30 बजे तक चली, जबकि दूसरी सर्जरी 2:30 बजे शुरू होकर शाम 6 बजे पूरी हुई।
रोबोटिक सर्जरी में कम बहा खून
पारंपरिक खुले या लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में जटिल यूरोलॉजी मामलों में औसतन 1 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। लेकिन चमियाना में पहले दिन की रोबोटिक प्रक्रियाओं में रक्तस्राव मात्र 4 मिलीलीटर के करीब रहा। इसका कारण रोबोटिक आर्म्स की सूक्ष्म-कटाई और 3डी कैमरा से स्पष्ट दृश्य है, जिससे रक्त वाहिकाओं की पहचान और तुरंत नियंत्रण संभव हुआ।
6 महीनों में 400 सर्जरी का लक्ष्य
अटल संस्थान ने अगले छह महीनों में 400 रोबोटिक सर्जरी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ऑपरेशन-शेड्यूल, विशेषज्ञ भर्ती और तकनीशियन प्रशिक्षण की योजना तैयार की जा रही है। हर मरीज का विस्तृत क्लीनिकल डाटा दर्ज किया जाएगा।
सीएम सुक्खू बोले- मेडिकल टेक्नोलॉजी पर 2030 तक खर्च होंगे 3,000 करोड़
इस माैके पर सीएम सुक्खू ने कहा कि पांच साल पहले मेरी भी रोबोटिक सर्जरी हुई थी। मेरे मन में एक सोच थी कि रोबोटिक सर्जरी हिमाचल के अस्पतालों में भी होनी चाहिए। आज उस सोच को धरातल पर लाने में सफल हुए हैं और और पहला ऑपरेशन हुआ है। इसका फायदा प्रदेश में आम लोगों को होगा। कहा कि एम्स के स्तर की मेडिकल टेक्नोलॉजी चमियाना, आईजीएमसी, टांडा, नेरचाैक व हमीरपुर मेडिकल काॅलेज में दी जाएंगी। 2030 तक 3,000 करोड़ रुपये मेडिकल टेक्नोलॉजी पर खर्च किए जाएंगे। जायका से 1340 करोड़ का प्रोजेक्ट जल्द मंजूर होगा। जहां भी पुरानी एक्सरे मशीनें लगी हैं, उन्हें बदला जाएगा। आईजीएमसी में एमआरआई की मशीन बदली जाएगी।