स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब जुन्गा के परीक्षण अब अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक मानकों के अनुरूप होंगे। वर्तमान में लैब प्रबंधन इन मानकों को पूरा करने की प्रक्रिया में जुटा है। लैब को हर लिहाज से दिसंबर तक आईएसओ के मानकों तक पहुंचा दिया जाएगा।
जनवरी 2015 को आईएसओ की मान्यता के लिए दावा पेश किया जाएगा। इसके बाद नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर लैबोरेट्रीज (एनएबीएल) की टीम दौरा करेगी और लैब के दावों की जांच कर मान्यता देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आईएसओ मानकों को पूरा करने के सिलसिले में जुन्गा लैब, मंडी और धर्मशाला लैब के 20 से अधिक वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया गया। इन्हें भारतीय मानक ब्यूरो के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एसके चौधरी ने दिया। शनिवार को एक सप्ताह का यह प्रशिक्षण समाप्त हुआ।
इसके अलावा लैब के उपकरणों, आधारभूत ढांचा मजबूत करने, सुरक्षा और गुणवत्ता के पहलुओं पर कार्य किया जा रहा है। लैब को आईएसओ की मान्यता मिलने के बाद यहां के परीक्षणों को न केवल अमेरिका और ब्रिटेन की तर्ज पर अंतरराष्ट्रूीय स्तर का मानक मिलेगा बल्कि यहां की रिपोर्ट को कहीं चैलेंज भी नहीं किया जा सकेगा।
जनवरी 2015 में लैब की आईएसओ मान्यता के लिए अप्लाई किया जाएगा। तीन महीने में हम इस मान्यता के मानकों को पूरा करेंगे। इसके बाद हिमाचल प्रदेश की फोरेंसिक साइंस लैब आईएसओ मान्यता प्राप्त एक हजार लैब की फेररिस्त में शामिल होगी।
- डॉ. अरुण शर्मा. निदेशक. स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब जुन्गा