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दवाओं के छिड़काव से सेब की सेटिंग से क्वालिटी फल की पैदावार पर असर

Sat, 13 Jun 2020 10:12 AM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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फाइल फोटो
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हिमाचल में दवाओं के छिड़काव से सेब की सेटिंग से फल की क्वालिटी पैदावार पर असर पड़ने लगा है। अधिक पैदावार लेने के चक्कर में बागवान बगीचों में फल की सेटिंग को अनावश्यक छिड़काव कर रहे हैं। इससे पेड़ों पर अधिक संख्या में फल टिक जाते हैं, लेकिन क्वालिटी की पैदावार ज्यादा नहीं हो पा रही है।

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पिछले कई दशकों से सेब फसल पर निगरानी रखे बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में क्वालिटी से ज्यादा सेब की अधिक पैदावार पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। प्रदेश में सिर्फ बीस फीसदी प्रगतिशील बागवान ही ऐसे हैं, जो क्वालिटी को तरजीह देते हैं। प्रगतिशील बागवान बगीचों में सेब की प्राकृतिक रूप से सेटिंग होने के बाद क्वालिटी की फसल लेते हैं। 

प्रदेश में पिछले साल करीब पौने चार करोड़ पेटी सेब पैदा किया गया, लेकिन इसमें बीस से तीस फीसदी ही क्वालिटी सेब पैदा किया जा सका है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्वालिटी सेब पैदा किया जाता है तो इससे फसल के दाम अच्छे मिलते हैं। बी और सी ग्रेड के सेब की पैदावार बढ़ने से बागवानों को अच्छे दाम नहीं मिल पाते। 
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बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि सेब पेड़ों पर फलों की सेटिंग से फसल ज्यादा जरूर मिलती है, लेकिन क्वालिटी सेब कम पैदा होता है। फसलों की सेटिंग प्राकृतिक रूप से होती है तो खराब फल स्वयं झड़ जाते हैं। क्वालिटी सेब पैदा होने से फसल के रेट अच्छे मिलते हैं। पेड़ों पर कमजोर फल भी टिके रहने से क्वालिटी सेब की पैदावार घट जाती है।

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