एचआरटीसी बस पास के लिए बच्चों ने दिया है शुल्क
निजी स्कूलों के विद्यार्थी परेशान, अभिभावक बोले, पैसे तो लौटा दो
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम की कुछ निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए चार्टर्ड बस सेवा शुरू नहीं हुई है। अभिभावकों ने फरवरी में नए सत्र के लिए तीन से चार हजार रुपये खर्चकर तीन माह के लिए बस पास बनवाए थे। निगम ने न तो बसें चलाईं और न ही अभिभावकों को पैसे वापस किए।
शहर और उपनगरों के छात्र इस सेवा से वंचित रह गए हैं। सेक्रेड हार्ट ढली, डीएवी टूट, चैप्सली स्कूल जैसे संस्थानों के दर्जनों छात्रों को निगम की बस सुविधा नहीं मिली। हैरत इस बात की है कि निगम ने अभी तक पास के पैसे भी वापस नहीं किए हैं। निगम की शर्त है कि एक रूट पर 30 छात्र-छात्राओं के पास बनने पर ही बस सेवा शुरू की जाती है। कई रूटों पर यह शर्त पूरी नहीं हुई। अभिभावकों ने निगम अधिकारियों को ईमेल और लिखित पत्राचार कर बसें रूट पर न चलाए जाने पर पास के पैसे वापस करने की मांग की है। निगम प्रबंधन ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। बस सेवा शुरू न होने पर अभिभावक हर माह 2500 से 3500 रुपये टैक्सी किराये पर खर्च कर रहे हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उन्होंने 3800 रुपये ऑनलाइन जमा किए थे जिसमें 238 रुपये पास बनाने में खर्च हुए। यदि पास बनाने के पैसे नहीं लौटाए जाते तो उसे काटकर कम से कम 3600 रुपये तो निगम वापस करे। निगम के अधिकारियों ने माना कि बस पास के पैसे लौटाने की अभिभावकों की ओर से मांग की है, इसे मुख्यालय को भेजा है। फैसला आने पर ही राशि को लौटाया जा सकेगा।
हर छात्र को बस सुविधा मुहैया करवाए निगम : चौहान
जनवादी महिला समिति की महासचिव फालमा चौहान ने निगम से मांग की है निगम शहर के हर निजी स्कूल के लिए चार्टर्ड बसें चलाएं। नए सत्र में चार्टर्ड बसें चलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। कोई भी छात्र बस सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए जिससे शिक्षा को बचाया जा सके। निगम को चार्टर्ड बसों से अच्छी आय होती है। उन्होंने पहली तिमाही में पास बनवाने पर भी बस सुविधा से महरूम रहे छात्रों के अभिभावकों को पैसे लौटाने की मांग परिवहन निगम से की है।