कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी अब फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकेंगे। हिमाचल के नवीं से जमा दो कक्षा के स्कूलों में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत उन्नति प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है।
राज्य परियोजना निदेशालय ने प्रोजेक्ट के तहत किए जाने वाले कार्यों और इन कार्यों के लिए प्रस्तावित बजट का प्लान तैयार कर लिया है। इस प्रोजेक्ट के लागू होने से उच्च शिक्षण संस्थानों में अंग्रेजी की कमजोरी स्कूली बच्चों को परेशान नहीं करेगी।
निजी कंपनी की मदद से बच्चों के इंग्लिश स्पीकिंग में सुधार लाया जाएगा। उन्नति अभियान के तहत प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को अंग्रेजी में बोलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूल में छुट्टी होने के बाद या दिन में किसी विशेष समय का इंतजाम कर निजी कंपनी की मदद से अंग्रेजी भाषा पर काम किया जाएगा।
इंटरनेट के इस युग में अधिकांश वेबसाइट्स पर अंग्रेजी में ही जानकारी मिलती है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के नवीं से जमा दो कक्षा के बच्चे प्रतियोगिता के इस दौर में पिछड़ न जाए, इसके लिए स्कूल स्तर पर ही स्पीकिंग और अंडरस्टेंडिंग इंग्लिश पर काम किया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक घनश्याम चंद ने इसकी पुष्टि की है।
प्रदेशभर में शुरू होंगे प्रयास, प्रेरणा, उड़ान प्रोजेक्ट
सर्व शिक्षा अभियान के तहत गुणात्मक शिक्षा देने के लिए प्रदेश के तीन जिलों में विशेष अभियान चलाए गए हैं। प्रेरणा अभियान जिला हमीरपुर में, प्रयास अभियान जिला बिलासपुर में और उड़ान अभियान जिला मंडी में चलाए जा रहे हैं। साल 2016-17 के दौरान इन अभियानों को प्रदेश के अन्य जिलों में भी चलाया जाएगा।
- उड़ान : मंडी जिला में पहली से पांचवीं कक्षा तक चलाया जा रहा है। इसके तहत बच्चों के पढ़ने, लिखने, बोलने पर ध्यान दिया जाता है।
- प्रयास : बिलासपुर में चल रहे इस अभियान के तहत छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों में गणित और विज्ञान के प्रति रुचि पैदा की जाती है। सरल तरीके से पढ़ाई करवाने के प्रयास किए जाते हैं।
- प्रेरणा : इस अभियान के तहत हमीरपुर में पहली से आठवीं के बच्चों की भाषा, न्यूमरेसी पर काम किया जा रहा है। क्लासरूम में बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करना है, इसका प्र्रशिक्षण शिक्षकों को दिया जाता है।
‘परिहार’ पु. (सं.) को परिहरण का दूसरा रूप कह सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ परिहरण के अर्थ और आशय से दूर है। परिहार में पहला मुख्य आशय है- ध्यानपूर्वक और निरंतर किसी बात से दूर रहना या बचना अथवा किसी को दूर रखना या बचाना। इसी से मिलता-जुलता और भाव भी इसमें शामिल है और वह है-खंडन, विरोध, सुधार से किसी त्रुटि, दोष या विकार का अंत या निराकरण करना।