दरअसल, मलबे में अब भी चिंगारियां दबी हैं। लिहाजा लगातार धुआं उठ रहा है। हवा चलते ही चिंगारियां भड़कने लगती हैं और फिर आग की लपटें उठ रही हैं। रात भर ग्रामीण और दमकल कर्मी मलबे से फूटतीं चिंगारियों और लपटों की पहरेदारी में लगे रहे।
इस दौरान कभी एक तरफ से आग की लपटें उठतीं तो कभी दूसरी तरफ से। इससे आसपास के घरों तक आग पहुंचने का खतरा बना रहा। हालांकि रात भर की मशक्कत से आग की लपटों को उठते ही बुझा दिया गया। गांव में बड़े पैमाने पर मलबा पड़ा हुआ है।
जिसमें दबीं चिंगारियां खतरे का सबब बनी हुई हैं। इसी डर से दिन और रात के समय मलबे के ढेरों की निगरानी पड़ रही है। स्थानीय निवासी हरीश जनारथा समेत अन्य लोगाें ने सीएम जयराम ठाकुर से मांग की है कि आग पूरी तरह बुझने तक दमकल के दो वाहनों को गांव में ही रखा जाए।
सीएम ने आश्वसन दिया कि आग पूरी बुझने तक दमकल दस्ता यहां पर ही रहेगा। लोगाें के कहने के बाद ही दमकल वाहन को कशैणी गांव से वापस बुलाया जाएगा।