वीरभद्र सिंह के कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए जिन वरिष्ठ नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया था, उन्हें सुक्खू ने कांग्रेस के प्रदेश में सत्तासीन होने पर बाहर नहीं किया। इन नेताओं को साथ लेकर सुक्खू ने अपनी नई टीम खड़ी की, जिसका वीरभद्र सिंह लगातार विरोध करते रहे।
कांग्रेस अध्यक्ष बदलने पर राठौर ने भी पुराने पदाधिकारियों को साथ लेकर कुछ क्षेत्रों में नई टीम बनाई। इसके बावजूद लोकसभा चुनाव सहित दो विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। कांग्रेस नेताओं के मतभेद दूर करने में राठौर भी कामयाब नहीं हो सके।
बकौल राठौर बीते दिनों कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात में उन्होंने अपनी टीम को सही तरीके से न बनाने का दर्द सुनाया। जिसके बाद हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस के इतिहास में पहले बार सभी कार्यकारिणियां भंग करने का फैसला लिया। अब राठौर की अगली भूमिका सोनिया गांधी के फैसले पर टिक गई है। देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान राठौर को शक्तियां देकर मजबूत करती है या किसी और को अध्यक्ष पद देकर नवाजती है।
वीरभद्र का हाल जानने हॉलीलॉज पहुंचे राठौर
वीरवार शाम को कुलदीप राठौर ने हॉलीलॉज पहुंच कर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान व भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विचार विमर्श भी हुआ।