ऐसे में अब तक का कारोबार 18 करोड़ 500 रुपये बनता है। पिछले साल टमाटर का परचून मूल्य सौ रुपये तक गया था। निचले क्षेत्रों में हिमाचल के टमाटर की भरपूर मांग थी, लेकिन इस बार कर्नाटक के टमाटर ने दिल्ली समेत उत्तर भारत की कई बड़ी मंडियों पर अपनी धाक जमा ली।
सोलन सब्जी मंडी के सचिव प्रकाश कश्यप का कहना है कि कर्नाटक के टमाटर ने हिमाचल की बिक्री पर असर डाला है। जो व्यापारी हिमाचल पर निर्भर थे, अब कर्नाटक की तरफ रुख कर रहे हैं।
इस बार सौ रुपये किलोग्राम के हिसाब से भी क्रेट भेजने पड़ रहे हैं। पिछले साल 1200 से 1400 रुपये तक क्रेट का अधिकतम दाम रहा था। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि किसान एक ही फसल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इससे नुकसान हुआ है। पिछले साल टमाटर अच्छा था तो इस साल शिमला मिर्च और अदरक के दाम अच्छे मिले हैं, लेकिन ज्यादातर किसानों ने शिमला मिर्च और अदरक की खेती ही नहीं की। किसानों को फसल बदल-बदल कर खेतीबाड़ी करनी चाहिए।