साल 2010 में मित्रा के प्रधान सचिव राजस्व रहने के दौरान एक ही साल के अंदर करीब ढाई सौ से ज्यादा लोगों को 118 के तहत मंजूरी दे दी गई। ब्यूरो ने मामला दर्ज किया, लेकिन किन्हीं कारणों से क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी गई।
धारा 118 के तहत मंजूरी देने के एवज में घूस लेने के कथित मामले में विजिलेंस ब्यूरो की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट इसी साल 25 मई को कोर्ट ने वापस कर दी थी। कोर्ट ने जांच अधिकारियों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी भी की थी।
कोर्ट की फटकार के बाद ब्यूरो ने नए सिरे से जांच शुरू की जिसके बाद अब तक दो दर्जन लोगों के बयान लिए जा चुके हैं। जांच में लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए अब तक डेढ़ दर्जन को नोटिस जारी किए गए हैं।
सूत्रों की मानें तो प्रारंभिक पूछताछ के बाद जांच अधिकारी उन्हें लाई डिटेक्टर टेस्ट में शामिल होने के लिए भी बुला सकते हैं। हालांकि टेस्ट में शामिल होना न होना व्यक्ति का अधिकार है। लेकिन ब्यूरो की कोशिश यही है कि उनके बयानों की सत्यता और बयानों को अब तक की जांच से जोड़कर सत्यता को सामने लाया जा सके।