जिन मासूम बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उत्तर प्रदेश से लोग बद्दी आए थे। अब उन्हीं मासूमों के शव लेकर उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है। कुदरत के कहर ने मासूम बच्चों को भी नहीं बख्शा। यूपी के प्रवासी कामगारों पर बीती रात बारिश के साथ तूफान काल बनकर आया और प्रवासियों के तीन परिवारों पर तो इस कद्र कहर बरपा है कि चार बच्चों सहित दो महिला व दो पुरुषों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
यह परिवार बद्दी के वार्ड-4 स्थित स्वराज माजरा गुजरां में झुग्गियों में गुजर बसर कर रहा था, जहां एक बंद उद्योग की दीवार ढहने से ये प्रवासी दबकर काल के ग्रास बन गए। बताया जा रहा है कि जिस जगह झुग्गियां बनी हैं, वह शामलात भूमि है और उद्योग ने जो दीवार बनाई है, वह बिना पिल्लरों के ही बनाई है।
जो हवा के झोंके बर्दाश्त नहीं कर सकी और प्रवासी कामगारों के ऊपर गिर गई। प्रवासियों की पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची, जहां से शवों को बाहर निकाला और एंबुलेंस से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। बहरहाल, अब इस जगह पर सिर्फ प्रवासियों की यादें ही शेष रह गई है।
हादसे में बच गए प्रवासी अपने सामान और यहां बसने वाली यादों को समेटने में जुटे हुए हैं। एसपी बद्दी बीएस चौहान ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यदि इसमें किसी की लापरवाही सामने आती है तो पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
परिषद करेगी पीड़ितों के लिए फौरी व्यवस्था
नप बद्दी के ईओ अजमेर सिंह ने कहा कि इस हादसे के शिकार हुए परिवारों के परिजनों को फौरी राहत प्रदान करते हुए परिषद की ओर से छत मुहैया करवाई जाएगी। पीड़ितों के परिजनों को तिरपाल एवं खाने पीने की सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
ठोस नीति बनाने पर चल रहा पत्राचार: एसडीएम
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि सरकारी भूमि से झुग्गियों को हटाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से कार्रवाई करता है। प्रवासियों के लिए एक स्थाई और ठोस नीति बनाने के लिए सरकार से पत्राचार किया जा रहा है, ताकि जो भी प्रवासी कामगार काम की तलाश में आए, उन्हें सिर्फ चिन्हित और सुविधा संपन्न जगह पर ही बसाया जा सके।