मंगलवार दोपहर बाद 13,050 फीट ऊंचे रोहतांग दर्रा सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। बीआरओ ने ग्रांफू-काजा सड़क की बहाली का कार्य शुरू किया हुआ है। वाहन मंगलवार को अटल टनल रोहतांग से कोकसर पहुंचे। जिला चंबा में भरमौर और पांगी की ऊपरी चोटियों में 7 से लेकर 17 सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। वहीं, निचले क्षेत्रों में दिनभर रुक-रुक कर बारिश का क्रम जारी रहा। मौसम के बदले मिजाज ने ठंड बढ़ा दी है। जिले में मंगलवार को पांगी-सलूणी में दो सड़कें बंद रहीं। नौ ट्रांसफार्मर बंद होने से 45 गांवों में अंधेरा पसरा रहा। विभागीय टीमें पटरी से उतरी सेवाओं को सुचारु करने के कार्य में जुटी हुई हैं। पांगी के कणू नाला के पास भूस्खलन के बाद जाम लगा हुआ है। ऊना, नाहन और सोलन जिला में भी दोपहर के समय हल्की बारिश हुई। सोमवार रात को कुकुमसेरी-कल्पा में न्यूनतम तापमान 0.4, ताबो में 1.1, मनाली में 5.5, शिमला में 8.0, सोलन में 8.5, धर्मशाला में 11.2, नाहन में 12.0, मंडी में 12.1, कांगड़ा में 13.2, ऊना में 13.7 और बिलासपुर में 14.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।
| क्षेत्र |
अधिकतम तापमान |
| कांगड़ा |
26.0 |
| मंडी |
24.8 |
| नाहन |
24.3 |
| ऊना |
23.6 |
| धर्मशाला |
22.0 |
| सोलन |
18.5 |
| मनाली |
18.2 |
| शिमला |
15.2 |
अप्रैल के पहले सप्ताह में सामान्य से 82 फीसदी अधिक बरसे बादल
हिमाचल प्रदेश में एक से सात अप्रैल के दौरान सामान्य से 82 फीसदी अधिक बारिश दर्ज हुई है। इस अवधि के दौरान सोलन, शिमला, मंडी और बिलासपुर में झमाझम बारिश हुई। ऊना और किन्नौर में सामान्य से कम कम बादल बरसे। एक से सात अप्रैल तक 15.2 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया है। इस वर्ष अप्रैल के पहले सप्ताह में 27.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 82 फीसदी अधिक रही। बिलासपुर में सामान्य से 150 फीसदी, चंबा में 36, हमीरपुर में 20, कांगड़ा में 120, कुल्लू में 54, लाहौल-स्पीति में 75, मंडी में 216, शिमला में 271, सिरमौर में 82, सोलन में 485 फीसदी अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई। जिला ऊना में सामान्य से 9 और किन्नौर में 12 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई।
सोलन में रातभर से हो रही बारिश, कई सड़कें बंद
जिलेभर में रातभर से तेज बारिश हो रही है। इससे कई सड़कें बंद हैं, वहीं सुबह के समय कई बसें भी लोकल रूटों पर बंद रही। सबसे ज्यादा परेशानी अभिभावकों को बच्चों को स्कूल छोड़ने में आई। उन्होंने बारिश में बच्चों को स्कूल छोड़ने जाना पड़ा। वहीं लगातार हो रही बारिश से ठंड भी काफी अधिक हो गई है। अभी भी बारिश का क्रम जारी है।
बारिश और बर्फबारी से सेब के पड़ों से फूल झड़ने की आशंका
ऊपरी शिमला के कई क्षेत्रों में अप्रैल में बर्फबारी हुई है। निचले क्षेत्रों बीती रात से लगातार बारिश जारी है। बुधवार सुबह नारकंडा, चौपाल के बागी में ताजा हिमपात हुआ। किनौर की ऊंची चोटियों पर भी हिमपात हुआ है। जबकि कल्पा, रिकांगपिओ, सांगला में बारिश जारी है। कुल्लू के जलोड़ी जोत में भी बर्फबारी हुई है। इस बारिश और बर्फबारी ने शिमला के बागवानों पर कहर ढहाया है। इस दिनों सेब के पेड़ों पर फूल आ रहे हैं। इस बारिश और बर्फबारी से उनके झड़ने की आशंका है, जिससे पैदावार पर असर पड़ेगा।
ऊना में बारिश का दौर जारी, तापमान में भी गिरावट दर्ज
ऊना जिले भर में मंगलवार रात से बारिश का दौर जारी है। बुधवार सुबह भी कुछ घंटे के लिए बारिश रुकने के बाद दोपहर के समय फिर से बारिश शुरू हो गई। इससे बीते दो दिनों से मौसम में ठंडक बढ़ गई है। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। लोगों ने एक बार फिर से गर्म कपड़ों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी बारिश होने की संभावना जताई है।
मंडी-पंडोह फोरलेन पर बड़ा हादसा टला: जागर नाला के पास विशाल डंगा ढहा, 20 परिवार खतरे में
चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत मंडी-पंडोह मार्ग पर आज सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जागर नाला के समीप सड़क किनारे बना विशालकाय डंगा अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे करीब 30 मीटर सड़क हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि यह डंगा हाल ही में निर्माणधीन फोरलेन परियोजना के तहत लगाया गया था, लेकिन बरसात शुरू होने से पहले ही इसका गिरना निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है इसी स्थान पर पहले भी डंगा गिर चुका है, जिसे कंपनी द्वारा दोबारा बनाया गया था। बावजूद इसके, दोबारा इतनी जल्दी ढह जाना साफ तौर पर लापरवाही को दर्शाता है। घटना के बाद आसपास के अन्य डंगों में भी दरारें पड़ गई हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है। सड़क किनारे रहने वाले लगभग 20 परिवारों के घरों पर संकट मंडरा रहा है। लोगों में भारी दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों ने निर्माण कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रोष जताया है और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
स्थानीय ग्रामीण सूरत राम ने कहा है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि प्रभावित क्षेत्र का तुरंत निरीक्षण कर सुरक्षित निर्माण सुनिश्चित किया जाए और दोषी ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इस बारे के एम सी कम्पनी के प्रोजेक्ट मैनेजर सत्या से बात कि गई तों उन्होंने बताया कि इस जगह मिट्टी कि सेटलमेंट हो रही है जिस कारण डंगा गिरा है। इसे हम विशेषज्ञयो से विचार विमर्श करके नए सिरे से लगवाएंगे।