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दिसंबर महीने में हुई बर्फबारी सेब पौधों के लिए लाभदायक

Thu, 13 Dec 2018 05:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश में दिसंबर महीने में हुई ताजा बर्फबारी सेब के लिए लाभदायक होगी। इससे सेब बगीचों को नमी मिली है। वर्ष 2014 में दिसंबर महीने में हिमपात हुआ था। दिसंबर में बर्फबारी से बगीचों में लंबे समय तक नमी रहती है।

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साथ ही सेब के पौधों के लिए चिलिंग ऑवर्स (जरूरत के अनुसार ठंड) शुरू हो गए हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को सलाह दी है कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उपयुक्त समय पर बगीचों का प्रबंधन करें और सही वक्त पर खाद डालें।

दिसंबर में रातें लंबी और दिन छोटे होते हैं। ऐसे में दिसंबर की बर्फबारी सेब पौधों के लिए खुराक का काम करती है। पौधों को 12 सौ से 16 सौ घंटे तक कड़क ठंड की जरूरत रहती है। चिलिंग ऑवर्स पूरे होते हैं तो अगले सेब सीजन में पैदावार अच्छी होने की उम्मीद जगती है। 

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बगीचों में वैज्ञानिक सलाह से डालें खाद

मौसम विज्ञान केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार इससे पहले 13 दिसंबर, 2014 को बर्फ बारी हुई थी। इस बार 11 दिसंबर, 2018 की रात को बर्फबारी हुई है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि बागवान बगीचों में वैज्ञानिक सलाह से उपयुक्त समय पर खाद डालें।

बर्फबारी के तुरंत बाद खाद डालने से ज्यादा लाभ नहीं होगा। देखना होगा कि बगीचों में पांच-सात दिन बाद जब नमी हो जाएगी तो खाद डालने का काम करें। बागवान सुपर फासफेट डालना चाहते हैं तो प्रति पौधा दो किलो खाद डालें। गोबर की सड़ी गली खाद डालनी है तो प्रति पौधा 40 से 50 किलो खाद डालें।

देसी खाद डालने से बगीचों में खाद का कुशन बन जाता है। प्रदेश में जिन किसानों ने गेहूं की बिजाई कर रखी है, उन्हें कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि वे गेहूं के खेतों में पनप रही खरपतवार को समय पर उखाड़ दें। ऐसा करने से गेहूं के पौधे तीव्र गति से बढ़ने लगते हैं। अन्य कृषि फसलें तैयार हैं और उनका तुड़ान किया जाना है। 
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