हिमाचल में एसएमसी से शिक्षकों की भर्ती प्रो. प्रेमकुमार धूमल की सरकार में शुरू हुई थी। धूमल सरकार ने साल 2011-12 में करीब 250 शिक्षकों को एसएमसी से प्रदेश के दुर्गम और दूरदराज क्षेत्रों के स्कूलों में नियुक्त किया था। सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस सरकार ने 2017 में करीब 2100 शिक्षकों की भर्ती कर इस प्रथा को कायम रखा। फिर सत्ता बदलने पर जयराम सरकार ने 2018 में 250 शिक्षक भर्ती किए।
वर्तमान में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कुल 2613 एसएमसी शिक्षक सेवाएं दे रहे थे। शुक्रवार को प्रदेश हाईकोर्ट से आए एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला सुनाकर शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। जिन एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द हुई हैं, उनमें 770 पीजीटी, 590 टीजीटी और शेष सीएंडवी और जेबीटी हैं।एसएमसी से शिक्षक भर्ती का मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर सरकार ने अगस्त 2019 में भर्ती बंद कर दी थी।
सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि कोर्ट के आगामी आदेशों तक सरकारी स्कूलों में नए एसएमसी अध्यापक की नियुक्ति अथवा चयन नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने स्टॉप गैप अरेंजमेंट के नाम पर की जा रही एसएमसी भर्तियों को प्रशंसनीय कदम नहीं बताने की तल्ख टिप्पणी की थी। सरकार ने दिसंबर 2018 में स्कूलों में रिक्त पदों पर एसएमसी से भर्ती करने के आदेश जारी किए थे। सामान्य क्षेत्रों में छह माह और जनजातीय क्षेत्रों में तीन माह से रिक्त पदों पर एसएमसी से शिक्षक भर्ती को कहा गया था। जुलाई 2019 में इसकी अधिसूचना जारी हुई थी।
फरवरी और अप्रैल में नहीं दिया सेवा विस्तार
एसएमसी पर नियुक्त शिक्षकों को सरकार हर साल सेवा विस्तार देती आई है। इस साल शीतकालीन स्कूलों के फरवरी में खुलने के बाद सरकार ने इन्हें सेवा विस्तार नहीं दिया। ग्रीष्मकालीन स्कूलों में लगे शिक्षकों को अप्रैल में सेवा विस्तार दिया जाना था लेकिन इन्हें भी सेवा विस्तार नहीं मिला।
बीते साल एसएमसी शिक्षकों के पदों को मान लिया था रिक्त
एसएमसी शिक्षकों की जगह नई भर्ती करने की तैयारी सरकार ने बीते साल ही कर दी थी। मंत्रिमंडल से मंजूरी लेने के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने 1541 एसएमसी शिक्षकों के पदों को रिक्त मानते हुए इनकी जगह आरएंडवी नियमों में नई भर्ती की अधिसूचना जारी की थी।