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Shimla News: छोटे किसानों को नहीं मिल रहा सौर उर्जा बाढ़ योजना का लाभ

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लागत अधिक होने से किसान नहीं दिखा रहे रुचि
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90 फीसदी किसानों ने वापस लिए प्रार्थना पत्र

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के किसान सौर ऊर्जा बाड़ योजना का लाभ नहीं ले रहे। सरकार ने यह योजना जंगली और लावारिस जानवरों से फसलों को बचाने के लिए शुरू की है। इसे लगाने में ज्यादा लागत आने से 90 फीसदी किसानों ने अपने प्रार्थना पत्र वापस ले लिए हैं।

योजना में लगभग एक लाख रुपये प्रति बीघा बाड़ लगाने की लागत आ रही है। इसमें 80 फीसदी उपदान मिलता है और 20 फीसदी खर्च किसानों को वहन करना पड़ रहा है। इसमें किसानों को पांच बीघा भूमि पर सौर उर्जा बाड़ लगाने के लिए एक लाख रुपया देना होता था जो हर लघु और सीमांत किसानों के बस की बात नहीं है।
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शिमला ग्रामीण के बनूटी से सटी पाहल पंचायत के प्रगतिशील किसान और सेवानिवृत अधिकारी हेमचंद वर्मा ने कहा कि ज्यादातर किसान मॉडल खर्चा ज्यादा आने से इस योजना का लाभ नहीं उठा पर रहे। इसके अलावा जो किसान अपने खेतों में बाड़ लगा रहे हैं वह भी अपने खेतों को जानवरों से नहीं बचा पा रहे। लंगूर और बंदर पेड़ों से छलांग मार कर खेतों में घुस जाते हैं। सरकार की ओर से चलाई गई इस योजना की लागत ज्यादा होने से किसान इसे नहीं अपना रहे। किसानों को उम्मीद है कि आगामी बजट में इस योजना में राहत देकर इसे किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा।
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