देश के सभी पहाड़ी राज्यों में सिक्किम की तर्ज पर पानी के चश्मों को बचाने के लिए काम होगा। जिस प्रकार सिक्किम प्रदेश ने पिछले दस सालों में पानी के चश्मों को विकसित करने के लिए धारा विकास पहल शुरू की, उसी तरह अब देश के अन्य राज्यों भी इस मॉडल पर काम करेंगे।
धर्मशाला में केंद्रीय जल संशासन मंत्रालय की कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों ने सिक्किम के धारा विकास पहल की सराहना की। कार्यशाला में सिक्किम प्रदेश की मनरेगा परियोजना निदेशक कम अतिरिक्त सचिव सारिका प्रधान ने अपने प्रदेश में चश्मों को बचाने के लिए विकसित मॉडल पेश किया।
इसमें उन्होंने मनरेगा के तहत गांव स्तर पर पानी के चश्मों को बचाने के लिए किए कामों की जानकारी दी। कहा कि पंचायत की ग्राम सभा और पंचायत समिति के माध्यम से भी पानी के चश्मों को विकसित करने की दिशा में काम किया गया है।
उन्होंने एक जंगल क्षेत्र की झील को संरक्षित करने को उदाहरण भी दिया। इसमें झील के तीन चित्र में दिखाए गए, जो झील कभी सुख गई थी आज वह पानी से भरी है।