कांगू सड़क हादसे ने एक पल में विवाह की खुशियों का माहौल मातम में बदल दिया। भयावह हादसा नव दंपति परिवार को ताउम्र जख्म दे गया। जिस मां ने बड़े चाव से अपने जिगर के विवाह में रस्मों को निभाकर परिवार में नई दुल्हन का पलकें बिछाए स्वागत किया,
पलक झपकते ही वह पलकें हमेशा के लिए बंद हो गईं। शादी में बड़े चाव से शिरकत करने वाले बुआ और फूफा की जान भी यह हादसा लील गया। बैंक में जोनल मैनेजर के पद पर तैनात हरीश चंद्र सेठी के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे विक्की का विवाह भंगरोटू की शिवानी के साथ पूरे रस्मों रिवाज के साथ हुआ।
सोमवार सुबह विदाई के बाद बारात के लिए सुंदरनगर स्थित एक निजी होटल में नाश्ते का इंतजाम किया गया था। नाश्ते के बाद सभी लोग अंबाला के लिए रवाना हुए।
शाम को वधू के स्वागत के लिए पहले से ही रिश्तेदार मौजूद थे। मंगलवार को विवाह की रिसेप्शन के लिए खानसामा भी काम पर लगे थे। लेकिन सुंदरनगर से महज 17 किलोमीटर दूर उनकी खुशियों को नजर लग गई।
रिश्तेदारों ने दी हादसे की सूचना
करीब आधा दर्जन गाड़ियों का काफिला अंबाला के लिए रवाना हुआ। कुछ आगे चल रहे थे तो कुछ पीछे। दूसरे वाहनों में सवार रिश्तेदारों को इस हादसे की सूचना मिली तो उनके पांव तले जमीन खिसक गई।
सभी अपने वाहनों को लेकर आननफानन में अस्पताल पहुंचे, जहां घायलों की हालत और रिश्तेदारों के शव देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। चीख-चित्कारों से साथ सारा अस्पताल परिसर गूंज गया।
एक के बाद एक खून से लथपथ पहुंच रहे थे अस्पताल
ट्रैवलर में सवार एक के बाद एक रिश्तेदार खून से लथपथ हालत में एंबुलेंस से पहुंच रहे थे तो उनकी पीड़ा किसी से देखी नहीं जा रही थी। इसी दौरान पता चला कि दूल्हे विक्की की मां नीलम सेठी, फूफा महेंद्र पाल डक्कर और उनकी पत्नी फूफी संतोष रानी, फूफा धर्मपाल कुमार, बुआ का दामाद रविंद्र कुमार और मासी शशि ओबराय अब इस दुनिया में नहीं रहे। उपचार के दौरान एक के बाद एक रिश्तेदार की मौत होने की सूचना मिलते ही सभी फूट-फूट कर रोने लग पड़े।
फूट-फूट कर रोए दूल्हा-दुल्हन
विलाप करते बारातियों ने फोन मिला कर रोते बिलखते अंबाला में अपने साथ हुई घटना की जानकारी परिवार के अन्य सदस्यों को दी। विवाह के बाद अपनी पत्नी को घर ले जाने के लिए रवाना हुआ दूल्हा भी दुल्हन के साथ अस्पताल पहुंचा।
जहां वह हादसे के बारे में बार-बार जानकारी लेता दिखा। लेकिन जब वह घायलों व मृतकों को देखने की बात करता तो परिवार के सदस्य उसे सांत्वना देते हुए सब ठीक है, कहते रहे।
जब उसे पता चला कि मां के साथ बुआ, फूफा व अन्य रिश्तेदार अब नहीं रहे तो वह भी दुल्हन संग फूट-फूट कर रोया। उसकी स्थिति देखते हुए परिवार के सदस्यों ने उसे अस्पताल से बिना वाहन से उतरे घर रवाना कर दिया।
तीन बच्चों के सिर से मां-बाप का साया
वजीरबावड़ी-निरमंड सड़क पर कारdd हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्य काल का ग्रास बन गए। 48 वर्षीय पिता सीता राम, उनकी पत्नी सीता देवी और 13 वर्षीय बेटे मंजीत की इस हादसे में मौत हो गई।
सीता राम पेशे से खेतीबाड़ी करते थे और बीते कई वर्षों से वह दत्तनगर में किराये के मकान में रह रहे थे। उनके घर पर 60 से अधिक उम्र की बूढ़ी मां सुमित्रा देवी, पुत्र अजय (18), अश्वनी (14) और बेटी बबीता (20) है।
कार हादसे में मरने के बाद तीनों बच्चों से मां-बाप का साया छिन गया है, वहीं मां से बुढ़ापे की लाठी छिन गई है। सीता राम मूल रूप से बड़ागांव क्षेत्र से हैं और बीते कई वर्षों से दत्तनगर में थे।
हालांकि कुछ समय पूर्व उनकी पत्नी को बायल परियोजना में काम पर रखा गया था और परिवार हंसी खुशी जीवन बसर कर रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही सीता राम की मां और बच्चों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
अब परिवार के साथ जीवन यापन करने का संकट खड़ा हो गया है। हादसे के बाद समूचे दत्तनगर गांव में मातम का माहौल पसर गया है। गांव का हर कोई शख्स गमगीन परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहा है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि मृतक सीता राम के बच्चों को यथा संभव मदद दी जाए ताकि वे अपना निर्वाह कर सकें।