इसे यंग सोल्जर कॉडर ट्रेनिंग कहते हैं। सूत्रों की मानें तो यह ट्रेनिंग एक ही दिन बाद खत्म भी हो रही थी। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि जवान शायद मार्च महीने के बाद छुट्टी न मिलने के चलते गहरे तनाव में था।
जवान को छुट्टी अफसर देते हैं, लेकिन इसके लिए जवान को पहले अपने सीनियर हवलदार को बताना होता है। छुट्टी की अर्जी हवलदार अपने सीनियर के जरिये अफसर तक पहुंचाता है।
इसी के बाद छुट्टी मंजूर होती है। माना जा रहा है कि शायद छुट्टी न मिलने के चलते तनाव में जवान ने अपने उच्च अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया। हालांकि, जवान ने घटना से पहले कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा है।
मौत के असल कारणों का पता पुलिस की पूरी तथ्यात्मक जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन नरसंहार के पीछे तनाव के संदेह ने बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।