श्रीखंड यात्रा को पांच सेक्टर में बांटा
श्रीखंड महादेव यात्रा को सुलभ बनाने के लिए पिछले नौ सालों से श्रीखंड ट्रस्ट समिति एवं जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। एसडीएम निरमंड एवं श्रीखंड ट्रस्ट समिति के उपाध्यक्ष मनमोहन सिंह ने श्रीखंड महादेव यात्रा को पांच सेक्टरों में बांटा गया है। इसमें 100 से अधिक कर्मचारियों के साथ ही बचाव टीमें भी तैनात रहेंगी। पहले बेस कैंप सिंघगाड़ में 40 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। यहां प्रतिदिन सुबह 5:00 से शाम 7:00 बजे तक श्रद्धालुओं का पंजीकरण और फिटनेस जांची जाएगी। यहां से शाम चार बजे तक ही श्रद्धालुओं का जत्थों यात्रा के लिए रवाना किया जाएगा। एसडीएम मनमोहन सिंह ने बताया कि इस बार ऑनलाइन 250 रुपये फीस के साथ यात्री पंजीकरण कर सकते हैं।
यात्रियों के लिए जरूरी हिदायतें
वर्ष 2014 से श्रीखंड यात्रा के दौरान सेवाएं देने वाले डॉक्टर यशपाल राणा ने बताया कि पार्वती बाग से ऊपर कई यात्रियों को ऑक्सीजन की कमी के चलते तबीयत बिगड़ने लगती है। ऐसे यात्री जिनको ऑक्सीजन की कमी महसूस हो, ज्यादा सांस फूलना, सिरदर्द होना, चढ़ाई न चढ़ पाना, उल्टी की शिकायत होना, धुंधला दिखना और चक्कर आना जैसे लक्षण आना शुरू हो तो ऐसे यात्री तुरंत आराम करें और नीचे की ओर उतरकर बेसकैंप में चिकित्सक से संपर्क करें। यात्री अपने साथ एक पक्का डंडा, ग्रिप वाले जूते, बरसाती छाता, सूखे मेवे, गर्म कपडे़, टॉर्च और ग्लूकोज लेकर जरूर आएं। कठिन और जोखिम भरी श्रीखंड महादेव यात्रा को 2014 से ट्रस्ट के अधीन किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद नौ सालों में करीब 32 श्रद्धालु इस कठिनतम यात्रा में अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए भी यह यात्रा किसी चुनौती से कम नहीं हैं।
ऐसे पहुंचे श्रीखंड महादेव तक
बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों को शिमला से रामपुर का करीब 130 किमी का सफर बस या टैक्सी से तया किया जा सकता है। इसके बाद रामपुर से निरमंड 17 किमी और निरमंड से जाओं का 23 किमी का सफर वाहन से तय करना होता है। इसके आगे श्रीखंड महादेव तक का पैदल करीब 32 किमी का सफर यात्रियों को करना होता है।
अलौकिक नजारे से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं यात्री
भीडवारी से पार्वती बाग की सुंदरता और इस बीच सप्तर्षि पहाड़ियों को पार कर जब यात्री श्रीखंड महादेव पहुंचते है, तो नजारा यहां का नजारा अलौकिक हो जाता है। यहां से भगवान कार्तिकेय की चोटी के दर्शन भी होते है। श्रीखंड की शीला पर गुप्त कंदरा से भेंट चढाकर यहां भोलेनाथ की पूजा कर भक्त जन लौटते है। कठिन यात्रा को भक्तजन संपूर्ण जीवन में हमेशा याद रखते हैं।