आईजीएमसी में करोड़ों रुपये से बने न्यू ओपीडी ब्लॉक में पार्किंग की सुविधा नहीं, हर रोज परेशान होते हैं लोग
विज्ञापन
वाहन पार्किंग के लिए मिलते हैं सिर्फ दस मिनट अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल में रोजाना उपचार करवाने के लिए आने वाले मरीजों के वाहनों के लिए कोई पार्किंग नहीं है। करोड़ों रुपये की लागत से 12 मंजिला न्यू ओपीडी ब्लॉक बना दिया है लेकिन पार्किंग अभी तक नहीं बन पाई है।
यहां मरीज लेकर आने वाले निजी वाहनों को सिर्फ पिक एंड ड्राॅप करने के लिए दस मिनट का समय मिलता है। इसके बाद तुरंत गाड़ी हटानी पड़ती है। अस्पताल के स्टाफ के मुख्य गेट के पास 70 वाहनों को पार्क करने के लिए पर्किंग है लेकिन इसमें सिर्फ आईजीएमसी के डाॅक्टर और सहयोगी स्टाफ के वाहन ही खड़े किए जा सकते हैं। तीमारदार जब अस्पताल मरीज लेकर आते हैं तो उन्हें यह परेशानी झेलनी पड़ती है कि वह मरीज को देखें या फिर वाहन के लिए पहले पार्किंग ढूंढे। अस्पताल के बाहर भी सड़क की दोनों ओर वाहन पहले से पार्क रहते हैं।
विज्ञापन
आईजीएमसी के ऊपर और नीचे से गुजरने वाली दोनों सड़काें के किनारे पहले से जहां भी संभावना है, वहां वाहन पार्क रहते हैं। ऐसे में तीमारदारों को गाड़ी खड़ी करने के लिए जगह नहीं मिलती। संजौली-ढली बाईपास, संजौली पार्किंग या फिर पुराने बस अड्डे के पास ही पार्किंग मिलती है। पार्किंग की इस विकराल समस्या के कारण लोग निजी वाहन से मरीज को उपचार करवाने के लिए ले जाने से कतराते हैं।
नए साल में होगा पार्किंग समस्या का समाधान
आईजीएमसी में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों की वाहन पार्क करने की समस्या का नए साल में स्थायी समाधान होगा। ऑकलैंड टनल के पास दो सौ वाहनों के पार्क करने और न्यू ओपीडी ब्लॉक तथा लक्कड़ बाजार के बीच बन रही करोड़ों की पार्किंग में सात सौ वाहन पार्क करने की क्षमता होगी। अस्पताल के आसपास ही लोगों को करीब एक हजार से अधिक वाहनों को पार्क करने की सुविधा मिलेगी। नगर निगम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर इस समस्या का स्थायी समाधान करने जा रहा है।
संजौली-ढली बाईपास पर पार्क करना पड़ी कार
आईजीएमसी के न्यू ओपीडी ब्लॉक में मरीज को कार में लेकर आए कुफरी निवासी राकेश कुमार ने बताया कि पहले अपने मरीज को यहां छोड़कर गया था। इसके बाद संजौली ढली बाईपास पर कार पार्क करने को जगह मिली। अब मरीज को दिखा दिया है तो वहां से फिर कार लेकर आया। इतना बड़ा अस्पताल बनाया है लेकिन एक से दो घंटे तक वाहन पार्क करने के लिए पार्किंग सुविधा नहीं है। इससे मुझे ही नहीं हर मरीज को परेशान होना पड़ता है। पूजा अपने बेटे अर्नव की टांग में लगे प्लास्टर को खुलवाने को लाई थी। उन्होंने कहा कि यहां सबसे ज्यादा चिंता गाड़ी पार्क करने की रहती है। कम से कम एक घंटे गाड़ी पार्क करने का समय दिया जाना चाहिए।