शिव की आराधना का पर्व महा शिवरात्रि 17 फरवरी को मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग बनने जा रहा है। 20 वर्ष बाद पड़े इस योग के कारण यह शिवरात्रि महादेव की आराधना के लिए विशेष फलकारी है।
ज्योतिषाचार्य पंडित जेआर शर्मा के अनुसार मंगलवार के दिन महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र इस दिन दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा जो बुधवार की सुबह 9:27 बजे तक रहेगा। इससे पहले यह स्थिति वर्ष 1995 के फरवरी माह में ही बनी थी।
श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण कर रखा है। इसकी वजह से भक्तों के लिए महाशिवरात्रि विशेष शुभकारी है। साथ ही महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व 16 फरवरी को सोम प्रदोष का संयोग भी रहेगा।
ऐसे करें व्रत
शिवरात्रि के दिन प्रात: उठकर स्नानादि से निवृत होकर शिव मंदिर जाएं। वहां शिवलिंग का पूजन करें। गीता में कहा गया है कि या निशां सर्वभूतानां तस्या जागृर्ति संयंमी। यस्यां जागृति भूतानि सा निशा पश्चतो सुने:।
यानी विषयों से युक्त सांसारिक लोगों की जो रात्रि है।ए उसमें संयमी लोग ही जागृत अवस्था में रहते हैं और जहां शिवपूजा का अर्थ पुष्प चंदन एवं बिल्वपत्र धतूरा भांग आदि अर्पित कर भगवान शिव का जप व्रत करते हुए एकाकार होना ही शिवपूजा है।
चार प्रहर चार पूजा
महाशिवरात्रि में चार प्रहरों में अलग-अलग विधि से पूजा का प्रावधान है। पहले प्रहर में भगवान शिव की ईशान मूर्ति को दूध द्वारा स्नान कराएं, दूसरे प्रहर में उनकी अघोर मूर्ति को दही से स्नान करवाएं और तीसरे प्रहर में घी से स्नान कराएं और चौथे प्रहर में शहद से स्नान कराना चाहिए। इससे भगवान आशुतोष अतिप्रसन्न हो जाते हैं।
यहां मनाई जाती है शिवरात्री
हिमाचल में मंडी शिवरात्री के बाद सोलन के जटोली मंदिर में शिवरात्री धूमधाम से मनाई जाती है। शिवरात्री के लिए एक दिन पहले भजन किर्तन शुरू हो जाता है। वहीं इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी है।
इसके अतिरिक्त जिला के कुनिहार में शिव गुफा, अर्की के लुटरू व मुटरू महादेव, धर्मपुर के पट्टा के मोड स्थ्ति शिव मंदिर, कसौली चौक शिव मंदिर आदि जिला के मुख्य स्थानों पर शिवरात्री धूमधाम से मनाई जाती है।
वहीं, राजधानी शिमला समेत प्रदेश के दूसरे शिवालयों में भी शिवरात्रि बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है।
पूजा की ये विधि भी है फलकारी
शिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव की घर पर ही बड़े सरल तरीके से पूजा अर्चना की जा सकती है। आचार्य योगेंद्र दत्त शर्मा के अनुसार भगवान शंकर की पूजा के लिए स्वच्छ आसन पर बैठकर पूजन सामग्री को यथास्थान रख कर दीप प्रज्ज्वलित करें।
स्वस्ति पाठ के साथ पूजन प्रारंभ करें। इसके बाद पूजन का संकल्प कर भगवान गणेश और माता पार्वती का ध्यान करें। इसके बाद बिल के पत्तों और अक्षत (चावल के दानों) से भगवान शिव का ध्यान करें।
भगवान शिव का ध्यान करने के बाद दही स्नान, घी स्नान, शहद व शक्कर स्नान करें। इसके बाद भगवान का पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद भगवान शिव को फल और मिठाई अर्पित कर आरती करें।
पूजा से मिलेगा ये फायदा
-महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर का परिवार सहित अभिषक करें। ऐसा करने से आपसी मनमुटाव दूर होता है।
-वाहन सुख के लिए शिवलिंग पर गुलाब के फूल चढ़ाएं
-संतान सुख के लिए घतूरे से शिव का पूजन करें
-आरोग्यता के लिए शिव का कुशा से पूजन करें
-लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से शिव पूजन करें
-अभीष्ट सिद्धि के लिए शहद से शिव का अभिषेक करें
-समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए गाय के दूध से शिव का अभिषेक करें