हॉकी खेल में गोल्ड मेडल जीत लाए शुभम
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यदि लक्ष्य बनाकर मेहनत की जाए तो मंजिल तक पहुंचने के लिए कोई चुनौती नहीं रोक सकती। ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहा है पांवटा साहिब के सैनवाला मुबारकपुर निवासी 14 वर्षीय शुभम। शुभम का जज्बा ऐसा है कि हर कोई उसकी सराहना करते नहीं थकता। शुभम नन्ही आयु में मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। सिर से माता-पिता का साया भी उठ चुका है। गरीबी का आलम है और बीमारी से जिंदगी की जंग जारी है।
बावजूद इसके हॉकी में यह सितारा चमकने के लिए बेताब है। शुभम ने हाल ही में हिमाचल की टीम के साथ मध्यप्रदेश के ग्वालियर में खेले मैच में बिहार और छत्तीसगढ़ को कड़ी टक्कर देकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। अब शुभम नेशनल हॉकी खिलाड़ी बन चुका है। बता दें कि शुभम के सिर से माता-पिता का साया काफी पहले ही उठ चुका है। इसके बाद शुभम और उसके दो भाई-बहनों के पालन पोषण का जिम्मा उनकी बूढ़ी दादी मां संभाल रही हैं।
ऐसे में परिवार गरीबी में जैसे-तैसे गुजारा कर रहा था कि भगवान ने एक और परीक्षा शुभम के लिए दे दी। शुभम बचपन में ही मधुमेह से पीड़ित है। उसका पीजीआई चंडीगढ़ से इलाज चल रहा है। पैसे की कमी से इलाज भी रुक गया है। आलम यह है कि इंसुलिन जैसे इंजैक्शन खुद ही लगाने पड़ रहे हैं। हैरानी इस बात की भी है कि इतने भयानक रोग में जब किसी रोगी के लिए चलना फिरना तक भी मुश्किल हो जाता है, ऐसे में शुभम की हिम्मत है कि वह खेल में आगे बढ़ रहा है। शुभम ने बताया कि उसका लक्ष्य है कि वह हॉकी खेल में गोल्ड मेडल जीत लाए। जब नन्हे खिलाड़ी की हालत का पता घृत बाहती महासभा को लगा तो उसके अध्यक्ष नंदलाल प्रवाल, शुभाष चौधरी, दाताराम, पुष्पा चौधरी, प्रदीप ने सहायता राशि दी।