पेपर लीक के मामले सामने आने के बाद भंग किए गए हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग की बहाली करवाने की मांग को लेकर शनिवार को बारिश के बीच बेरोजगार युवाओं ने राज्य सचिवालय के बाहर जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। सुक्खू सरकार पर अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए भर्ती परीक्षाएं रद्द न कर परिणाम निकालने की मांग की गई। इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार का नकारात्मक रवैया रहने पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की भी युवाओं ने चेतावनी दी। बेरोजगार युवाओं ने कहा कि सरकार ने दो माह में भर्तियां शुरू करने की बात कही थी, लेकिन स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन है।
15 मार्च को हमीरपुर से शुरू किया था पैदल मार्च
15 मार्च को हमीरपुर से पैदल मार्च शुरू कर शनिवार को शिक्षित बेरोजगार युवा संगठन के बैनर तले सैकड़ों युवा शिमला पहुंचे। युवाओं ने कहा कि सरकार ने कहा था कि साठ दिन में भर्तियां शुरू होंगी। इसी बीच सरकार ने कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को भंग ही कर दिया। लोकसेवा आयोग के माध्यम से भर्तियां करवाने की बात कही, लेकिन अभी तक लोकसेवा आयोग ने इस पर काम शुरू नहीं किया। कई युवाओं ने भर्ती परीक्षा दी है। उनके परिणाम नहीं निकाले जा रहे। युवाओं ने कहा कि राज्य लोकसेवा आयोग की भूमिका भी संदेहास्पद है। कॉलेज कैडर की असिस्टेंट भर्तियों को लेकर भी आरोप लग रहे हैं। ऐसे में सरकार को हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग को मजबूत कर बहाल करना चाहिए। युवाओं ने सचिवालय के बाहर चयन आयोग बहाल करो, भीख नहीं अधिकार चाहिए, युवाओं का शोषण करना बंद करो.. जैसे नारे लगाए।
एक माह में नई भर्तियां शुरू करने का सीएम ने दिया आश्वासन
बेरोजगार युवाओं ने शनिवार शाम को सचिवालय जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने एक माह में नई भर्तियां शुरू करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं के जो मामले कोर्ट में फंसे हैं, उन्हें देखा जा रहा है। जिन परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, उन्हें रद्द किया जाना है या नहीं, इस पर अभी विचार जारी है। मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं को आश्वस्त करते हुए अपने-अपने घरों को लौटने का आग्रह भी किया। पेपर लीक मामले में 20 लाख लगे जुर्माना, जब्त हो संपत्ति युवाओं ने कहा कि पेपर लीक के मामलों को अगर भविष्य में रोकना है तो सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे। पेपर लीक के मामलाें से जुड़े लोगों पर 20 लाख रुपये जुर्माना होना चाहिए। उनकी संपत्ति जब्त करनी चाहिए। पेपर लीक करने वाले अधिकारियों के बच्चों को भविष्य में किसी भी भर्ती में शामिल भी नहीं करना चाहिए।