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व्यापार मंडल के तेवर पड़े ढीले 29 अगस्त को करवाएगा चुनाव

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नाराज धड़े की बढ़ती सक्रियता केे चलते चुनाव न करवाने के फैसले से पलटे पदाधिकारी
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दोफाड़ हो चुका है शिमला व्यापारमंडल
नाराज धड़ा भी कर चुका है चुनाव एलान
व्यापार मंडल ने पहले चुनाव से किया था इनकार
अब नाराज धड़े की बढ़ती सक्रियता से नरम पड़े पदाधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। व्यापार मंडल शिमला के तीखे तेवर ढीले पड़ गए हैं। व्यापारमंडल के पदाधिकारी दो दिन पहले तक यही कहते रहे कि अभी चुनाव नहीं होंगे। लेकिन नाराज धड़े की बढ़ती सक्रियता के बाद अब व्यापार मंडल अपने फैसले से पलट गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि व्यापार मंडल ने अपने चुनाव नाराज गुट के चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले 29 अगस्त को करवाने का फैसला लिया है। नाराज गुट ने पांच सितंबर को शिमला व्यापार मंडल के चुनाव रखे हैं। शनिवार को शिमला व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने इस बारे में बैठक की। कई अन्य कारोबारी नेताओं ने भी अपने सुझाव दिए। कहा कि शहर के कारोबारी दोफाड़ न हो, इसके लिए चुनाव करवा लिए जाएं। व्यापार मंडल पदाधिकारी भी चुनाव करवाने पर एकमत दिखे। इसके बाद 12 सदस्यीय चुनाव कमेटी का भी गठन कर दिया है। इसमें सभी उपनगरों के नेता को भी शामिल किया है। यह सदस्य अब खुद अपने मुख्य अधिकारी को नियुक्त करेंगे। चुनाव से पहले 15 अगस्त तक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। एक दुकान से एक वोट का नियम यहां भी लागू होगा। सदस्यता के लिए शुल्क लिया जाएगा या नहीं, इस पर एक दो दिन में फैसला लिया जाएगा।
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उपनगरों के कारोबारी भी लेंगे चुनाव में हिस्सा
चुनाव कमेटी में लोअर बाजार से अशोक कुकरेजा, कार्टरोड से रमनीक गोयल, रामबाजार से राजू सबेस्टियन, टुटू से राजू सूद, मालरोड से मौंटी, ढली से गोपाल शर्मा, कसुम्पटी से रज्जी, संजौली से गोपाल, लोअर बाजार से राजीव, घणाहट्टी से सुरेश गुप्ता, शोघी से श्रीकांत, गंज बाजार सुभाष चंद को शामिल किया है। इस चुनाव में उपनगरों के कारोबारी भी शामिल होंगे। जो कारोबारी चुनाव लड़ेगा, उसकी दुकान और जीएसटी नंबर होना जरूरी है। शिमला व्यापार मंडल अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह और महासचिव संजीव ठाकुर ने कहा कि कारोबारी दोफाड़ न हो, इसके लिए चुनाव करवाने का फैसला लिया है। कहा कि सभी एकजुट होकर चुनाव में हिस्सा लेंगे।
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अब हाउस के बिना ही ले
लिया चुनाव का फैसला
शिमला। व्यापार मंडल शिमला ने बीते हफ्ते इस मामले पर जनरल हाउस बुलाया था। इसमें एक साल के लिए चुनाव टालने का फैसला लिया था। इस पर कई कारोबारी नाराज हो गए थे और इन्होंने खुद ही अपने स्तर पर चुनाव का फैसला ले लिया। इनका कहना था कि दस साल बाद भी शिमला व्यापार मंडल खुद को एक साल की एक्सटेंशन दे रहा है। चुनाव टलने पर इन्होंने व्यापार मंडल मानने से ही मना कर दिया था। इसका व्यापार मंडल पर दबाव बढ़ गया। इस दबाव का असर ये हुआ कि शनिवार को बिना हाउस बुलाए ही अब चुनाव तारीखें तय करनी पड़ीं। नाराज गुट के कारोबारी नेता कंवलजीत सिंह और अश्वनी मिनोचा ने कहा कि यदि पहले ही कारोबारियों की बात मानी होती तो यह ड्रामा न करना पड़ता। कहा कि चुनाव एकसाथ करवाने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया है। यदि आने वाले दिनों में बात होती है तो एकसाथ चुनाव करवाने पर फैसला लिया जा सकता है। अभी अलग चुनाव ही हो रहे हैं।
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