राजधानी शिमला में 28 अप्रैल को चलती कार में छात्रा से दुष्कर्म मामले में पुलिस ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है। वारदात के 23 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म मामले में भी पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और मामला बढ़ने पर जांच सीबीआई ने की थी।
इस मामले की जांच को गठित एसआईटी के हाथ भी खाली हैं। एसआईटी कह रही है कि पीड़िता ने जो एफआईआर दर्ज करवाई है, उसमें ऐसे कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन मामले को सिरे से भी खारिज नहीं कर पा रही है। पीड़ित युवती के बाद सोमवार को उसके पिता ने अमर उजाला से संपर्क कर कहा कि इतने दिन बाद उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो चुकी है। सब आश्वासन दे रहे हैं, पर न्याय नहीं मिल रहा। परिवार पूरी तरह से टूट चुका है।
वहीं, हरियाणा महिला आयोग और कांग्रेस सीबीआई जांच की जरूरत बता चुके हैं। एसआईटी के प्रमुख एएसपी प्रवीर ठाकुर ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। उन्हें फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट जल्द भेजे इसके लिए जुन्गा लैब को रिमांडर भेज दिया है।
इन सवालों के देने हैं जवाब
- इस घिनौने अपराध में किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
- अगर वारदात से पहले पीड़िता गुड़िया हेल्पलाइन नंबर लेने गई थी तो लक्कड़ बाजार चौकी के भीतर उसने 14 मिनट क्या किया?
- मामले में चश्मदीद भी सामने आया है। क्या कोई सामान्य लड़की अधोवस्त्र में मदद मांगती?
- दो मई को सौंपी मजिस्ट्रियल रिपोर्ट पर सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
- फोरेंसिक रिपोर्ट आने में देरी क्यों हो रही है?
- एसआईटी आरोपी को क्यों नहीं खोज पाई और न ही ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश कर पाई है कि केस झूठा है।