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शिमला रेप केस: SP के बाद कई और अफसर भी सीबीआई के रडार पर

Fri, 17 Nov 2017 12:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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बहुचर्चित गुड़िया प्रकरण और इससे जुडे़ लॉकअप हत्याकांड में कई और अफसर भी सीबीआई के रडार पर हैं। आईजी, एसपी और डीएसपी समेत आठ पुलिस कर्मचारियों के बाद इस मामले में कई और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। अफसरों के माध्यम से सीबीआई नेताओं और रसूखदारों का भी इस मामले में कनेक्शन तलाश रही है। इन पर हाथ डालने के लिए ठोस सबूत खोजे जा रहे हैं।
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सीबीआई ने तीन महीने पहले आईजी जहूर एच जैदी, डीएसपी मनोज जोशी सहित आठ पुलिस वालों को लॉकअप हत्याकांड में गिरफ्तार किया। वीरवार को एसपी डीडब्ल्यू नेगी को गिरफ्तार करने से पहले करीब तीन महीनों तक सीबीआई एसपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए आधार तैयार करती रही। आधार मिलते ही डीडब्ल्यू नेगी को गिरफ्तार कर लिया गया।

अब इस प्रकरण में संलिप्त माने जा रहे कुछ अन्य अफसरों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाने की दिशा में जांच चल रही है। इस प्रकरण के बीच में कई अधिकारियों के बीच फोन पर संवाद हुआ। इसके लिए इलेक्ट्रानिक एविडेंस जुटाए जा रहे हैं कि ये संवाद किस तरह का हुआ। सीबीआई ने मोबाइल फोन टॉवरों से ये डंप डाटा भी लिया है कि कब किस अधिकारी ने किसको फोन किया और किस तरह की बातें हुईं। 
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नेताओं से भी जोड़े जा रहे लिंक
गुड़िया प्रकरण की जांच में ढील देने के पीछे की मंशा, छानबीन का रुख मोड़ने और लॉकअप हत्याकांड के लिंक नेताओं से भी ढूंढे जा रहे हैं। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि ये जांच-पड़ताल भी की जा रही है कि इन दोनों मामलों को लेकर नेताओं और अधिकारियों में किस तरह का संवाद हुआ है। अगर अधिकारियों ने लॉकअप हत्याकांड में लीपापोती की है तो इसमें कहीं ऊपर से दबाव तो नहीं था। अगर ऐसा कोई दबाव रहा तो ये किसका रहा और क्यों रहा।

आत्महत्या को उकसाने में मामले में भी आ चुका है एसपी का नाम

गुड़िया मामले में लॉकअप हत्याकांड में गिरफ्तार शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी का नाम किन्नौर के रारंग पंचायत निवासी खयाडुप ज्ञाछो (45) की मौत के मामले में भी आ चुका है। मामले की जांच कर रही किन्नौर पुलिस को ज्ञाछो की हैंड राइटिंग की रिपोर्ट आने का इंतजार है।

रिपोर्ट के आने के बाद किन्नौर पुलिस भी कोर्ट में चालान पेश करेगी। सूत्रों का कहना है कि ज्ञाछो ने डीडब्ल्यू नेगी की प्रताड़ना के चलते आत्महत्या कर ली थी। ज्ञाछो ने आत्महत्या के लिए सुसाइड नोट में नेगी को ही जिम्मेदार बताया था। 13 जून को ज्ञाछो का शव रिकांगपियो टैक्सी स्टैंड के पास मिला था।

इसके बाद ज्ञाछो की पत्नी भजन देवी की तहरीर पर किन्नौर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि, सुसाइड नोट में ज्ञाछो ने एसपी डीडब्ल्यू नेगी के अलावा पूह थाने के तत्कालीन एएसआई रमेश और हेड

कांस्टेबल हुकुम की प्रताड़ना और उसकी वजह से आत्महत्या करने की बात लिखी थी। इसके चलते किन्नौर पुलिस ने तीनों को पूछताछ के लिए भी बुलाया था। हालांकि, सत्ता के नजदीकी होने का लाभ मिलने के चलते किन्नौर पुलिस नेगी की गिरफ्तारी करने से कतरा रही थी।

पहले ही जेल में बंद हैं आईजी समेत आठ पुलिस वाले

गुड़िया प्रकरण की जांच में जुटी सीबीआई ने जिस मामले में शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी की गिरफ्तारी की है, उस मामले में पहले ही आईजी जहूर जैदी समेत आठ लोग जेल में बंद हैं। इन सभी पर गुड़िया प्रकरण में आरोपी रहे सूरज की पुलिस लॉकअप में हत्या और हत्या के सबूत मिटाने तथा साजिश रचने के आरोप हैं। 29 अगस्त, 2017 से अब तक आठों आरोपी जेल में बंद हैं।

सूत्रों की मानें तो आईजी जहूर जैदी अपनी जमानत के लिए एक बार आवेदन कर चुके हैं, जिसे सीबीआई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसी तरह मामले में गिरफ्तार डीएसपी मनोज जोशी ने भी जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

इस मामले में सीबीआई ने आईजी जहूर जैदी, डीएसपी मनोज जोशी, एसआई राजेंद्र सिंह, एएसआई दीपचंद, कॉन्सटेबल सूरत सिंह, रंजीत सरेटा, रफीक अली और मोहन लाल को गिरफ्तार किया था और अब ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं। 29 नवंबर को सभी आठों पुलिस वालों की गिरफ्तारी को तीन महीने हो जाएंगे।

नियमानुसार सीआरपीसी की धारा 167 (2) की उपधारा (1) के तहत मृत्युदंड, आजीवन कारावास और 10 साल तक की सजा वाले मामलों में न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी के खिलाफ  90 दिन में जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश करना जरूरी है। ऐसे में संभव है कि सीबीआई 29 नवंबर या उससे पहले मामले में अपनी चार्जशीट फाइल कर सकती है।

गुड़िया मामले में कब क्या हुआ

4 जुलाई : करीब 4:20 बजे गुड़िया महासू स्कूल से अपनी सहेली के साथ घर के लिए निकली। 
5 जुलाई : गुड़िया का भाई मामा के घर से जब अपने घर गया तो उससे परिजनों ने गुड़िया के बारे में पूछा, उसने बताया कि गुड़िया तो पिछले पिछले घर आ गई थी। परिजनों और ग्रामीणों ने रात को गुड़िया की तलाश शुरू कर दी। 
6 जुलाई : गुड़िया के मामा को हलाइला गांव के निकट दो सड़कों के लिंक से नीचे एक गड्ढे में गुड़िया का शव छिन्न-भिन्न हालत में मिला। पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
7 जुलाई : गुड़िया के शव का आईजीएमसी शिमला में पोस्टमार्टम हुआ, दुराचार और हत्या का खुलासा। विसरा फ ोरेंसिक लैब को भेजा।
8 जुलाई : पुलिस दरिंदों तक नहीं पहुंची, जनाक्रोश भड़का। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी के निर्देश पर एसपी ने कोटखाई में कैंप किया।
10 जुलाई : एसपी को जांच से हटाया, आईजी जहूर एच जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित।
11 जुलाई : पीड़ित परिवार को पांच लाख मुआवजा। 
12 जुलाई : सीएम के फेसबुक पर फोटो हुई वायरल। सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध आरोपियों की फोटो वायरल। 
13 जुलाई : एसआईटी ने छह लोगों को गिरफ्तार किया।
14 जुलाई : ठियोग थाने पर पथराव, सीबीआई जांच की संस्तुति।
15 जुलाई : सीबीआई जांच के लिए पीएम को पत्र लिखा।
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17 जुलाई : राजभवन पहुंची भाजपा ने सरकार की बर्खास्तगी की मांग उठाई। 
18 जुलाई : सरकार ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच शुरू करने के लिए दाखिल किया आवेदन।
19 जुलाई : कोटखाई थाने में एक आरोपी की पुलिस हिरासत में हत्या
23 जुलाई : सीबीआई ने दर्ज किए दो मामले।
24 जुलाई : सीबीआई पहुंची शिमला, जांच शुरू
23 जुलाई : सीबीआई की टीम शिमला पहुंची
2 अगस्त : हिमाचल हाईकोर्ट में पुलिस ने सौंपी स्टेट्स रिपोर्ट, दो सप्ताह का समय मांगा
7 अगस्त : गुड़िया की बहनों ने पहनाई सीबीआई के अफसरों को राखियां
14 अगस्त : कोटखाई थाने में तैनात संतरी के हुए बयान
17 अगस्त : सीबीआई को हाईकोर्ट की फटकार, मांगा दो सप्ताह का समय
21 अगस्त : सीबीआई ने कई रईसजादों के घरों पर मारे छापे
29 अगस्त : सीबीआई ने आईजी जहूर एच जैदी के साथ अन्य पुलिस के अफसरों को गिरफ्तार किया। 
14 अक्तूबर : आरोपी आशीष चौहान जमानत पर रिहा। 
17 अक्तूबर : गुड़िया प्रकरण में पकड़े गए चार अन्य आरोपियों को भी जमानत। 
16 नवंबर : सीबीआई ने एसपी डीडब्ल्यू नेगी को गिरफ्तार किया। 
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