गुड़िया मामले से जुड़े सूरज हत्याकांड में गवाह बनने को राजी होने पर सीबीआई ने दो पुलिस अधिकारियों एएसपी भजन देव नेगी और डीएसपी रतन सिंह नेगी को क्लीन चिट दे दी है।
एसआईटी में शामिल दोनों अधिकारी अब आईजी जैदी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बनाए गए हत्या, प्रताड़ना और फर्जीवाड़े के मामले में सरकारी गवाह होंगे।
सीबीआई सूत्रों की मानें तो भजन देव नेगी और रतन सिंह नेगी सीबीआई की पूछताछ के दौरान गवाही देने को तैयार हो गए थे। उनका कहना था कि सूरज हत्याकांड से उनका कोई लेना देना नहीं।
उन्होंने शुरू से ही इससे किनारा कर लिया था। सीबीआई की ओर से बनाई गई चार्जशीट में दी गई 84 गवाहों की सूची में इन दोनों के भी नाम हैं।
जबरन गुनाह कबूल करवा दिया
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि 16 जुलाई को भजन नेगी और मनोज जोशी ने कोटखाई थाने का दौरा किया। उन्होंने पांचों गिरफ्तार लोगों से कड़ी पूछताछ की। चूंकि प्रताड़ना के शिकार दीपक उर्फ दीपू से जबरन गुनाह कबूल करवा दिया गया था, तो ऐसे हालात में दीपू और अन्य चार आरोपियों को सामने-सामने बिठाया गया।
इन सबके सामने उससे दोबारा पूछताछ की गई। इनमें से किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति ने अपराध की बात कबूल नहीं की। यानी दीपू ने भी ये बयान दिया कि उन सबने दुराचार और हत्या नहीं की। इस पूछताछ को भजनदेव नेगी ने गोपनीय तरीके से रिकार्ड किया। सूत्रों की मानेें तो इस रिकार्डिंग के संबंध में भी उनकी गवाही होनी है।
सीबीआई को और भी कई जरूरी सूचनाएं भजनदेव नेगी से पूछताछ में मिली है, जिनकी वे गवाही दे सकते हैं। बाद में एसआईटी में जोड़े गए डीएसपी यातायात शिमला रतन सिंह नेगी ने भी जांव में सीबीआई का सहयोग किया।
पांच आरोपियों को नेगी ने ही पकड़ा था
भजन देव नेगी
सूत्र बताते हैं कि भजन नेगी ने ही गुड़िया मामले के पांच आरोपियों को पकड़ा था। उन्होंने पूरी जांच के बाद ही आरोपियों के नामों को सार्वजनिक करने के लिए कहा था।
इस बारे में भजन देव और आईजी जैदी की लंबी बातचीत भी हुई थी, लेकिन जल्दबाजी में आरोपियों को पकड़े की जानकारी प्रेस कांफ्रेंस कर दे दी गई।
तभी भजनदेव ने एसआईटी से किनारा कर लिया। वे आईजी जहूर जैदी के नेतृत्व की टीम की ओर से की जा रही जांच से सहमत नहीं थे। भजन देव नेगी अलग तरह से जांच करना चाह रहे थे।
डीजीपी-एडीजीपी, एसपी भी गवाहों में शामिल
पुलिस अधीक्षक शिमला सौम्या सांबशिवन
- फोटो : अमर उजाला
डीजीपी सोमेश गोयल, एडीजीपी अतुल वर्मा, आईजी दक्षिणी रेंज सोनम नेगी और पुलिस अधीक्षक शिमला सौम्या सांबशिवन को भी सीबीआई के गवाहों की सूची में रखा गया है।
सीबीआई के मुताबिक जिन पांच लोगों राजू, सुभाष, दीपू, छोटू और आशीष चौहान को पुलिस की ओर फर्जी आरोपी बनाया, वे भी सीबीआई की तरफ से गवाही देंगे।
सीबीआई के अनुसार हलाइला गांव के दो युवकों ईशान चौहान और प्रशांत नेगी उर्फ हैप्पी को पुलिस ने गैर कानूनी तरीके से अपनी हिरासत में रखा। इन्हें भी गवाह बनाया गया है। मृतक सूरज सिंह की पत्नी ममता देवी भी गवाह होंगी।
कोटखाई थाने के पूर्व संतरी दिनेश शर्मा भी पुलिसवालों के खिलाफ गवाही देंगे। सूत्रों की मानें तो इसकी चार्जशीट में 84 लोग गवाहों के रूप में शामिल किए गए हैं। इनमेें अधिकारी, डाक्टर, कर्मचारी, हलाइला क्षेत्र के स्थानीय निवासी और तमाम तरह के लोग हैं
गुड़िया मामले में सीबीआई ने बिछाया जाल
सीबीआई टीम के एसपी एसएस गुरुम, डीएसपी सीमा पाहूजा, एएसपी आरके सेठी
गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में सीबीआई ने हलाइला, महासू में अपना जाल बिछा दिया है। सीबीआई की एक टीम हलाइला, दांदी, कोटखाई जाकर लोगों से पूछताछ कर रही है जबकि दूसरी टीम शिमला में डटी आईजीएमसी और फारेंसिक लैब जुनगा के चक्कर लगा रही है।
सूरज हत्या मामले में पुलसिया कहानी सामने आने के बाद अब कोटखाई के लोग हैरान है कि आखिर किसने गुड़िया को मारा है? सीबीआई की एसआईटी ने गुड़िया और सूरज हत्या मामले की जांच के लिए दो अलग अलग दस्ते बनाए थे।
इनमें से एक दस्ता का नेतृत्व एएसपी आरके सेठी कर रहे थे तो दूसरी टीम का नेतृत्व डीएसपी सीमा पाहूजा को दिया गया है। दोनों टीमों की निगरानी खुद एसपी एसएस गुरु म कर रहे हैं। सूरज हत्या कांड की जांच पूरी होने के बाद अब इस मामले को देख रही पूरी टीम को गुड़िया मामले की जांच में लगा दिया है।
पुलिस से भी हो रही पूछताछ
सूरज हत्याकांड के आरोपी पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों से भी गुड़िया दुराचार और हत्या मामले की पूछताछ की जा रही है।
पौने दो सौ लोगों के सैंपल जुटाए हैं सीबीआई ने
गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में सीबीआई की टीम ने पौने दो सौ के करीब लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं। सूत्र बताते हैं कि कई सैंपलों की रिपोर्ट सीबीआई को मिल चुकी है।