शिमला में बैनमोर के पास सड़क पर पड़ी दरारों पर बिछाए तिरपाल।
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शहर में दुरुस्त हो निकास सिस्टम : वीरेंद्र
वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बारिश के पानी की निकासी के लिए कोई व्यवस्था न होने से लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। हर बरसात में यही स्थिति पैदा होती है। सरकार, प्रशासन और नगर निगम बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था समरहिल सहित पूरे शिमला शहर में करें।
भवनों में दरारें आई हैं। ऐसे इन मकानों को खाली करवा दिया है। ऐसे भवनों को बचाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। - भूवन शर्मा, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम
प्रशासन और सरकार ने नहीं की मदद
भवन मालिक नरेश ने कहा कि उम्रभर की कमाई से घर बनाया था लेकिन अब उसे खाली करने के आदेश जारी हो गए हैं। मकान खाली करने पर उनकी प्रशासन और सरकार ने कोई मदद नहीं की है, कोई मुआवजा नहीं दिया है। मैं भी टैक्स देता हूं, इस मुश्किल घड़ी में मुझे मदद मिलनी चाहिए।
शिमला के भट्ठाकुफर में भूस्खलन से खतरे की जद में आए भवन। इससे लोगों में दहशत है।
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भवन खाली कर कहां जाएं : मनजीत सिंह
भवन मालिक मनजीत ने कहा कि सरकार और नगर निगम ने खतरे को देखते हुए भवन खाली करने को कह दिया है लेकिन अब वह कहां जाएं, उनके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं है। सारे रास्ते बंद हैं ऐसे में लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है।
घर गिरने का सता रहा डर : सरिता
स्थानीय निवासी सरिता ने कहा कि बीस सालों से समरहिल में रह रही हूं लेकिन इतनी तबाही और डर आज तक महसूस नहीं किया। शिव बावड़ी के हादसे के बाद अब तो हर पल घर के नीचे से जमीन धंसने और घर के गिरने का डर सता रहा है।
पानी निकासी की हो व्यवस्था : ईशिका
स्थानीय निवासी ईशिका चौहान ने कहा कि भवन खाली करने के लिए नगर निगम ने आदेश जारी कर दिए हैं लेकिन जब क्षेत्र में निर्माण हो रहा था तो उस समय में पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं देखी। इसका खामियाजा आज भवन मालिकों और यहां रह रहे लोगों को भवन खाली कर चुकाना पड़ रहा है। सरकार निकासी की उचित व्यवस्था करें।
जाखू हाउसिंग जाखू हाउसिंग कॉलोनी में सड़कों पर आई दरारें का जाजया लेते अधिकारी। में सड़कों पर आई दरारें का जाजया लेते अधिकारी।
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राजधानी में आई आपदा के लिए भारी बारिश ही नहीं बल्कि कई सरकारी महकमों की लापरवाही भी सामने आ रही है। शहर के कई वार्डों में भूस्खलन और पेड़ ढहने को लेकर सरकारी महकमों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विकासनगर की हिमुडा कॉलोनी में 15 से ज्यादा पेड़ ढह चुके हैं। कई पेड़ रिहायशी भवनों पर ढहे हैं जिससे भारी नुकसान हुआ है।
यह पेड़ पहाड़ी समेत खिसक रहे हैं जिससे अभी भी पूरी कॉलोनी पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय पार्षद रचना भारद्वाज के अनुसार इस कॉलोनी में एनएच का पानी आने से नुकसान हुआ है। पार्षद के अनुसार विकासनगर एनएच पर ड्रेनेज व्यवस्था के लिए कई बार एनएचएआई को शिकायतें दे चुके हैं लेकिन कोई कार्य नहीं हुआ। यदि विभाग गंभीरता दिखाता तो न पेड़ काटने पड़ते और न ही कॉलोनी पर खतरा मंडराता।
उधर, खलीनी की वन विभाग की कालोनी में 25 से ज्यादा पेड़ ढह चुके हैं। वन कर्मचारियों के अनुसार मिस्ट चैंबर के पास सड़क चौड़ी करने के लिए खुदाई की थी। ठेकेदार ने इसका मलबा यहीं डंप कर दिया। बरसात में इसी मलबे के कारण यहां बड़ी तबाही हो गई। यदि डंगा लगाकर ड्रेनेज व्यवस्था सुधारी जाती तो नुकसान न होता।