अभी तक 871 बच्चियों का टीकाकरण ही हुआ है, जबकि तीन सेशन जिले में हो चुके हैं। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चियों में कम जागरूकता को देखते हुए स्कूलों में कैंप लगाने शुरू कर दिए हैं। विभाग का मानना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चियों ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीका लगवाया है। इन बच्चियों में किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट्स नहीं आए हैं।
जिले में 29 मार्च से सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण शुरू किया है। 14 से 15 साल 90 दिन पूरे कर चुकी बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर के टीकाकरण किया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का दूसरा बड़ा कारण बच्चेदानी के मुंह का कैंसर है। सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99.7% मामले ऑन्कोजेनिक (उच्च जोखिम वाले) एचपीवी प्रकारों के लगातार संक्रमण के कारण होते हैं। यह टीका बाजार में 4000 से 5000 रुपये में निजी स्तर पर लगाया जाता है, जबकि सरकार की ओर से इसे अस्पतालों में मुफ्त में लगाया जा रहा है। शिमला जिले के 39 कोल्ड चेन में सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित बच्चियों का टीकाकरण किया जा रहा है।
सर्वाइकल कैंसर के टीकाकरण को लेकर स्कूलों में बच्चियों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए आशा वर्कर की टीम जागरूक कार्यक्रम में लगी हुई हैं। अभी तक 871 बच्चियों को बचाव के लिए टीका लग चुका है। अगले दिन भी टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। -डॉ. यशपाल रांटा मुख्य चिकित्सा अधिकारी, शिमला