चेस्टर हिल मामले पर बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरते हुए कहा कि इस प्रकरण में धारा 118 के उल्लंघन के साथ-साथ 'बेनामी ट्रांजेक्शन' की स्पष्ट संभावना है और एक वरिष्ठ अधिकारी ने राजस्व सचिव रहते हुए अपने पद का खुला दुरुपयोग किया है, जिसकी जानकारी मुख्यमंत्री को पहले से थी लेकिन अब इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक विरोधाभासों पर चुटकी लेते हुए कहा कि एक ओर मुख्य सचिव पुनर्नियुक्ति और सेवा विस्तार न देने के आदेश जारी करते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से एक अधिकारी को सेवा विस्तार दे दिया जाता है, जो यह दर्शाता है कि सरकार में कोई तालमेल नहीं है और 'व्यवस्था परिवर्तन' के नाम पर केवल अराजकता व्याप्त है।
मुख्यमंत्री सुक्खू को 'झूठ का मसीहा' करार देते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि असम चुनाव में स्टार प्रचारक के रूप में मुख्यमंत्री ने जिस प्रकार के असत्य दावे किए, उससे लगता है कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें केवल झूठ बोलने का ठेका दे रखा है। ऋण के आंकड़ों पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनके पांच वर्षों के कार्यकाल में केवल 19 हजार करोड़ का ऋण लिया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र सवा साल के कार्यकाल में 40 हजार करोड़ से अधिक का बोझ प्रदेश पर लाद दिया है, जिससे कुल ऋण अब 1.10 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है।
उन्होंने तंज कसा कि मुख्यमंत्री केंद्र की मदद को सदन में स्वीकार करने से कतराते हैं जबकि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ही राज्य को विकास कार्यों के लिए 4000 करोड़ रुपए मिले थे। अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के विरोधाभासी बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जब सरकार के भीतर ही 2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने के लक्ष्य पर सहमति नहीं है, तो जनता का विश्वास इस सरकार से पूरी तरह उठ चुका है। इस अवसर पर उनके साथ विधायक अनिल शर्मा, बलबीर वर्मा, उपाध्यक्ष बिहारी शर्मा, पायल वैद्य, प्रदेश सचिव प्रियंता शर्मा, मीडिया प्रभारी राकेश वालिया, जिला प्रवक्ता प्रताप ठाकुर और अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे।