- सितंबर 2012 से शहर में ग्रीन फीस लागू की गई
- फीस वसूली के लिए चार एंट्री प्वाइंट पर निगम ने बनाए थे बैरियर
- 2013 में एनएच और स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद ग्रीन फीस बंद
- एनएच से अनुमति लेकर निगम ने 19 सितंबर 2016 से फिर ग्रीन फीस वसूली को दी मंजूरी
- जुर्माना राशि, बैरियर से लगने वाले जाम और मोबाइल ऐप न बनने से लटका मामला
- जनवरी 2018 निगम ने जुर्माना राशि घटाने का प्रस्ताव किया तैयार
- मोबाइल ऐप और कम जुर्माने के साथ मार्च से फीस वसूली की तैयारी
निगम को होगी सालाना 15 करोड़ की आय
ग्रीन फीस से नगर निगम को करीब 15 करोड़ रुपये की सालाना आय होगी। इस आय को शहर के सौंदर्यीकरण, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता कार्यों पर खर्च किया जाएगा। नगर निगम आयुक्त रोहित जम्वाल का कहना है कि मार्च से ग्रीन फीस लागू कर दी जाएगी।
छोटे वाहन 200
बड़े वाहन 300
दोपहिया 50
बस 500
स्थानीय लोगों, सरकारी महकमों को मिलेगी राहत
शहर में जिन लोगों के पास बाहरी नंबर की गाड़ियां हैं, उन्हें यह फीस नहीं चुकानी होगी। ऐसे वाहन मालिक अपने वार्ड के पार्षद से प्रमाणपत्र लेकर स्पेशल परमिट हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा सेना, हिमाचल और केंद्र सरकार की गाड़ियों को भी इस फीस में छूट मिलेगी।
सैलानी यहां जमा करवा सकते हैं ग्रीन फीस
दूसरे राज्यों से शिमला आने वाले वाहन मालिक मोबाइल ऐप से अपनी फीस जमा कर सकेंगे। इसके अलावा शहर के होटलों, पार्किंग संचालकों की मदद से भी ग्रीन फीस जमा कर सकते हैं। नगर निगम पेट्रोल पंप, लोकमित्र केंद्र, कैफे आदि के जरिए भी पर्यटकों को फीस जमा करने की सुविधा देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, बिना बैरियर के होने वाली फीस वसूली कितनी कारगर रहती है, इसका आने वाले दिनों में पता चल पाएगा।