दो साल पहले शहर की पेयजल व्यवस्था चलाने के लिए कंपनी बनाने वाले भाजपा शासित नगर निगम ने अब सरकार से इसका नियंत्रण वापस देने की मांग की है। इस बारे में मेयर सत्या कौंडल ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। मेयर का कहना है कि पेयजल व्यवस्था नगर निगम के अधीन ही होनी चाहिए। कंपनी पर नगर निगम का नियंत्रण जरूरी है ताकि जनता को राहत मिल सके। कंपनी को नगर निगम के अधीन करने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि लोग आज भी पेयजल बिलों की शिकायतें लेकर नगर निगम पहुंच रहे हैं।
कंपनी लोगों को न तो मासिक बिल दे पा रही है और न ही नगर निगम पार्षदों के कामों को समय पर कर रही है। नगर निगम की सत्ता पर पहली बार काबिज हुई भाजपा ने विपक्षी पार्षदों के विरोध के बावजूद पेयजल व्यवस्था को कंपनी के जरिये चलाने का फैसला लिया था लेकिन पार्टी के ज्यादातर पार्षद अपने फैसले पर अब पछता रहे हैं। मेयर सत्या कौंडल का कहना है कि सरकार को पत्र लिखा है। निगम को कंपनी पर कंट्रोल मिलना चाहिए।
इसलिए मांग रहे नियंत्रण
कंपनी बनाने का फैसला लेने के वक्त नगर निगम सदन ने यह प्रस्ताव भी पारित किया था कि कंपनी पर निगम का पूरा नियंत्रण रहेगा। पेयजल दरें तय करने से लेकर अफसरों की एसीआर लिखने तक का अधिकार निगम सदन और प्रशासन के पास रहेगा। सरकार ने कंपनी पर निगम को पूरा नियंत्रण रखने की मंजूरी नहीं दी।
वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के लिए जरूरी है कंपनी
शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल सुविधा देने के लिए सतलुज से पानी लाने का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसे वर्ल्ड बैंक से पैसा मिलना है। वर्ल्ड बैंक की शर्तों के अनुसार इतने बड़े प्रोजेक्ट को चलाने के लिए अलग सिस्टम या कंपनी होना जरूरी है। इसलिए सरकार ने अलग कंपनी बनाने का फैसला लिया था। यदि सरकार अब कंपनी खत्म करती है या पेयजल व्यवस्था वापस लेती है तो 986 करोड़ के प्रोजेक्ट पर संकट आ जाएगा।