शिमला। नगर निगम की वार्षिक आम सभा (एजीएम) राजनीति की भेंट चढ़ गई। हामी भरने के बावजूद न तो मंत्री सुधीर शर्मा बैठक में पहुंच पाए और न ही कोरम पूरा हो पाया। शहर की जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए आठ पार्षदों ने भी बैठक में आना जरूरी नहीं समझा। इनमें छह पार्षद भाजपा के जबकि दो कांग्रेस के थे।
हालत यह थी कि 140 सदस्यों वाली एजीएम में महज 41 सदस्य ही बैठक में पहुंचे। ऐसे में बचत भवन में ही सियासत शुरू हो गई। भाजपा और कांग्रेस पार्षदों ने एक दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ा। कांग्रेसी पार्षद मीरा शर्मा ने कहा कि यह निगम की नाकामी है कि कोरम पूरा नहीं हो पा रहा।
भाजपा के पार्षद बैठक में नहीं आ रहे। माकपा पार्षद शैली शर्मा ने कहा कि भाजपा पार्षद पब्लिक के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भी बैठक में नहीं आए। इस पर स्थानीय विधायक एवं सदस्य सुरेश भारद्वाज ने पलटवार किया।
कहा कि सदस्य तो सीएम और अनिरुद्घ सिंह भी हैं। वे भी बैठक में नहीं आए। हालांकि इसी बीच अनिरुद्घ सिंह भी वहां पहुंच गए। भारद्वाज ने कहा कि मंत्री हामी भरने के बाद भी बैठक में नहीं आ रहे तो निगम क्या करे।
ये आठ पार्षद रहे गायब
बैठक से छह भाजपाई पार्षद शैलेंद्र चौहान, किमी सूद, विदुषी शर्मा, रेणु चौहान, पूर्णमल और बृज सूद गायब रहे। वहीं, कांग्रेस के भी दो पार्षद आनंद कौशल और कुलदीप ठाकुर बैठक में उपस्थित नहीं थे। निगम की ओर से इन सभी को बाकायदा लैटर जारी किए गए थे।
पार्षदों से मांगा जाएगा जवाब
हमने ही एजीएम बुलाने के लिए पहल की थी। लेकिन टाइम देने के बावजूद मंत्री बैठक नहीं आए जो गलत है। भाजपा के कुछ पार्षद बैठक में क्यों नहीं आए, इसके बारे में मेयर के जरिए उनसे जवाब मांगा जाएगा। आगे होने वाली बैठक में भाजपा के सब पार्षद पहुंचेंगे। -संजय सूद, भाजपा जिलाध्यक्ष
यह निगम की बैठक, पार्टी का लेना देना नहीं
यह नगर निगम की अपनी बैठक थी। निगम ने किसे बुलाया और कौन-कौन आया, ये नगर निगम ही जाने। इससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं है। मंत्री या कुछ पार्षद बैठक में नहीं आए, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
नरेश चौहान, कांग्रेस प्रवक्ता
सरकार और भाजपा दोनों का फेलियर
एजीएम न होने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां जिम्मेदार हैं। मंत्री पिछले साल नवंबर से इस बैठक के लिए टाइम नहीं दे रहे। अब हामी भरी लेकिन बैठक में पहुंचे ही नहीं।
यह वर्तमान नगर निगम की भी नाकामी है जो एजीएम नहीं करवा पा रहे। हम ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ हैं और कर्मचारियों की जायज मांगें पूरी होनी चाहिए। -संजय चौहान, पूर्व मेयर नगर निगम एवं माकपा नेता