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शिमला-कालका टॉय ट्रेन हादसे का सच आया सामने

Mon, 14 Sep 2015 09:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
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विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर चार्टर्ड टॉय ट्रेन के रोमांच भरे सफर पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह फैसला बीते शनिवार को टकसाल के पास 48 डिग्री के तीखे मोड़ पर चार डिब्बों वाली चार्टर्ड ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद लिया गया है। इस दुर्घटना में ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतर गए थे जिसमें दो ब्रिटिश महिला पर्यटकों की मौत हो गई जबकि कई गंभीर घायल हो गए थे। रेलवे का मेकेनिकल विंग टॉय ट्रेन के चारों डिब्बों की जांच कर रहा है। जांच में खरे उतरने के बाद ही इन्हें दोबारा ट्रैक पर दौड़ाया जाएगा।
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उधर, डीआरएम रेलवे दिनेश कुमार ने बताया कि ट्रैक में कोई खामी नहीं निकली है। दुर्घटना ओवर स्पीड या ट्रैकिंग एंड कैरिज वैगन यानी डिब्बों का सही ढंग से न जुड़ने की वजह से हुई है। जांच जारी है, जल्द इसका खुलासा हो जाएगा। हालांकि चार्टर्ड टॉय ट्रेन स्पीड को कंट्रोल रखने वाली आधुनिक तकनीक से लैस थी। उल्लेखनीय है कि इस टॉय ट्रेन की बुकिंग सिर्फ आईआरसीटीसी से ही होती है। इसके चार डिब्बे विशेष रूप से विदेशी सैलानियों के लिए तैयार किए गए हैं।

रात एक बजे बहाल हुआ मार्ग- परवाणू (सोलन)। दुर्घटना के बाद शनिवार देर रात एक बजे रेलवे मार्ग को बहाल किया गया। शनिवार को धर्मपुर में खाली हुई ट्रेन 52456 को कालका की तरफ भेजा गया। 3:30 बजे यह गुम्मा स्टेशन पहुंची और उसके बाद कालका। ट्रैक क्लीयरेंस में अपमिक्स यानी शिमला जाने वाली ट्रेन साढ़े चार बजे के बजाय करीब पौने दो घंटे देरी से सवा छह बजे चली। बड़ोग में यह ट्रेन सुबह आठ बजे पहुंची। करीब 12 घंटे बाद यातायात पूरी तरह बहाल हो सका।
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इन बिंदुओं पर जांच- 25 किमी स्पीडअप होते ही बजता है बजर रेल अधिकारियों के मुताबिक चार्टर्ड ट्रेन में गति नियंत्रित रखने का आधुनिक ऑटोमेटिक सिस्टम है। अगर ट्रेन 25 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी तो बजर बजता है और रेल की स्पीड लॉक हो जाती है। जांच का विषय है कि यह सिस्टम काम कर रहा था या नहीं?

वैगन कैरिज- डिब्बों का एक-दूसरे के साथ सही ढंग से न जुड़ने पर भी ट्रेन बेपटरी हो सकती है। बताया जा रहा है कि यदि स्पीड नियंत्रण में हो तो रेल बेपटरी होने का सिर्फ यही कारण बचता है। अगर डिब्बे सही न जुड़े हों या कोई पार्ट ढीला रह गया हो तो झटका खाकर यह डिब्बे डिरेल हो सकते हैं।

तो स्टेशन सेक्शन नहीं जिम्मेवार- स्टेशन सेक्शन जांच से बाहर है। बताया जा रहा है कि एक बार ट्रेन स्टेशन से निकल जाए और दूसरे स्टेशन के बीच के सफर में कोई हादसा हो जाए तो उसके लिए ब्लॉक सेक्शन जिम्मेवार होता है। मेकेनिकल वालों पर इस विंग की जिम्मेवारी होती है।

आज परवाणू में होगा पोस्टमार्टम- परवाणू (सोलन)। डीएसपी परवाणू प्रमोद चौहान ने बताया कि दुर्घटना में मारी गईं दो ब्रिटिश पर्यटकों का पोस्टमार्टम सोमवार को परवाणू में होगा। पहले इनका पोस्टमार्टम चंडीगढ़ में होना था लेकिन बाद में संबंधित थाना क्षेत्र में ही पोस्टमार्टम करवाने का फैसला लिया गया है।
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