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Shimla News: होटल मैनेजमेंट डिग्री के नाम पर लाखों की ठगी, निजी संस्थान के संचालकों पर एफआईआर

Tue, 21 Jul 2026 11:38 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

शिमला में होटल मैनेजमेंट डिग्री के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में अदालत के आदेश पर निजी संस्थान के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। छात्र का आरोप है कि करीब 3.50 लाख रुपये लेने के बावजूद छह साल बाद भी डिग्री नहीं दी गई। पुलिस मामले की जांच के साथ अन्य संभावित पीड़ित छात्रों की भी जानकारी जुटा रही है।
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एफआईआर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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होटल मैनेजमेंट की डिग्री के नाम पर छात्र के साथ कथित तौर पर लाखों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कोर्स पूरा होने के छह साल बाद भी विद्यार्थी डिग्री और डिप्लोमा के लिए भटक रहा है। अदालत के आदेशों के बाद पुलिस ने इस संबंध में ढली थाने में संजौली स्थित निजी संस्थान के चेयरमैन, समन्वयक समेत अन्य के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

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आशंका है कि इसी तरह से कई विद्यार्थियों के साथ होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के नाम पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है। इसे लेकर पुलिस भी गहनता से पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि संस्थान कुछ साल पहले बंद हो गया है। पुलिस को दी शिकायत में प्रियव्रत मौदगिल ने बताया कि वर्ष 2017 में सीनियर सेकेंडरी पास करने के बाद उसने होटल मैनेजमेंट कोर्स करने का फैसला किया। इसी दौरान संस्थान के समन्वयक एवं सेंटर हेड ने उनसे संपर्क किया और संस्थान के बारे में जानकारी दी। उसे बताया गया कि यह डिग्री यूजीसी से मान्य होगी। 

इसके बाद प्रियव्रत की मां अमिता शर्मा से भी बातचीत करके उन्हें आश्वासन दिए गए। इसी झांसे में आकर प्रियव्रत ने संजौली स्थित संस्थान में अक्तूबर 2017 में दाखिला ले लिया। संस्थान की ओर से तीन वर्षीय बीएससी होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग साइंस कोर्स की कुल फीस 1.74 लाख बताई गई। अतिरिक्त फीस, डिप्लोमा, परीक्षा फीस मिलाकर कुल 3.50 लाख रुपये वसूले गए।   इसके लिए उनके परिवार ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 2.94 लाख रुपये का एजुकेशन ऋण लिया। यह राशि संस्थान के खाते में ट्रांसफर की गई, जबकि अन्य राशि नकद दी गई।
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उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में कोर्स पूरा होने के बावजूद मूल मार्कशीट, डिग्री या डिप्लोमा नहीं दिया गया। केवल तमिलनाडु के एक विश्वविद्यालय के दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय की एक अस्थायी मार्कशीट दी गई। इसके बाद वह लगातार संस्थान के प्रबंधन से डिग्री मांगते रहे लेकिन उन्हें आश्वासन ही मिले। प्रभावितों ने कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग उठाई है।

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और छात्रों के भी ठगे जाने की आशंका...
वर्ष 2023 में जब प्रियव्रत संजौली स्थित कैंपस में पहुंचा तो पता चला कि परिसर खाली कर दिया गया है और अब ऑफिस भट्ठाकुफर शिफ्ट हो गया है। वहां जाने पर उसे आश्वासन दिया गया कि जल्द ही उसे डिग्री जारी कर दी गई जाएगी। इसके बाद भी हर बार आश्वासन देकर टाल दिया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि कई बैच के छात्रों को इसी तरह ठगा गया है। पहले उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस स्टेशन करवाई। कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अदालत का रुख किया। हाल ही में स्थानीय अदालत ने सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत पुलिस को इस संबंध में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने थाना ढली में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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