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शिमला रेप केस: DNA को लेकर CBI के शक के घेरे में स्टेट फोरेंसिक लैब

Fri, 01 Sep 2017 12:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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सीबीआई के शक के घेरे में हिमाचल की स्टेट फोरेंसिक लैब भी आ गई है। पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए आरोपियों से गुड़िया के शव से मिला डीएनए मैच नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसा दो ही सूरत में हो सकता है। एक, पुलिस ने जिन्हें पकड़ा उन्होंने गुडि़या का रेप और मर्डर नहीं किया, इसलिए उनके सैंपल मैच नहीं हुए।
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दूसरा, गुड़िया के शव से नमूने वैज्ञानिक तरीके से नहीं लिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात ये कि गुड़िया की मौत के कोई आठ दिन बाद ये जांच के लिए नमूने लैब पहुंचे थे।

सवाल ये भी है कि सीबीआई नेजब मामले से जुड़ी पुलिस अफसरों को ही गिरफ्तार कर रिमांड पर ले लिया तो वह राज्य की फोरेंसिक लैब पर यकीन कैसे करेगी? गुडि़या मामले से जुड़े सारे नमूने सीबीआई जब्त कर दिल्ली ले जा चुकी है। सीबीआई फोरेंसिक लैब विशेषज्ञों पर भी शिकंजा कस सकती है।  
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किसी भी आरोपी का डीएनए मैच नहीं

सीबीआई टीम के एसपी एसएस गुरुम, डीएसपी सीमा पाहूजा, एएसपी आरके सेठी
पुलिस ने डीएनए टेस्ट के लिए छह आरोपियों समेत नौ लोगों के नमूने लिए थे। अब ये बात सामने आ रही है कि राज्य फोरेंसिक लैब की जांच में इनमें से किसी के डीएनए मैच नहीं हुए हैं। हालांकि, इसकी अधिकारिक पुष्टि न सीबीआई कर रही है न लैब। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि फोरेंसिक विशेषज्ञों ने शुरू से ही इस मामले में लापरवाही बरती।

छह जुलाई को जब कोटखाई के दांदी जंगल में गुडि़या का शव मिला था तो पुलिस के पांच घंटे बाद फोरेंसिक  निदेशालय से विशेषज्ञ स्पॉट पर पहुंचा। ये फोरेंसिक विशेषज्ञ केवल बायोलॉजी का ही एक्सपर्ट था। ये केवल शरीर की जांच ही कर सकता था। सूत्र बताते हैं कि स्पॉट पर पुलिस अफसरों और इस अधिकारी में तालमेल नहीं था।

इस अधिकारी ने गुडि़या के शव की जांच बिना फोरेंसिक फोटोग्राफर के की। सूत्रों ने बताया कि मौके पर फोरेंसिक फिजिकल डिविजन का कोई अधिकारी भी नहीं गया, जो शव के आसपास की जमीन, रास्ते के अलावा कपड़ों आदि से नमूने एकत्र कर सकता था। 
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विशेषज्ञ ने सही तरीके से नहीं लिए सैंपल

सूत्रों की मानें तो स्पॉट से फोरेंसिक विशेषज्ञ को कोई खास चीज नहीं मिली। शव को भी सादे कफन में लपेटकर लाया गया। हाथ, मुंह और अन्य हिस्से फोरेंसिक किट से नहीं ढके गए। आईजीएमसी शिमला में हुए पोस्टमार्टम से जुटाए नमूनों पर ही फोरेंसिक विशेषज्ञों की लैब में जांच चली।

अस्पताल से ही इस लैब तक नमूने पहुंचाने में भी चार दिन लग गए थे। इससे भी इनके एकदम ताजा स्थिति में नहीं पहुंचने पर सवाल उठ रहे थे। बताया जा रहा है कि फोरेंसिक लैब जुन्गा और नई दिल्ली की प्रयोगशालाओं में हुई जांच में जो डीएनए मिला है, वह

न तो पुलिस के बनाए आरोपियों राजू, दीपक, छोटू और सुभाष के अलावा आशीष चौहान से मैच कर रहा है और न ही ये किसी अन्य संदिग्ध से ही मैच हो रहा है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई सबूतों को ठीक से एकत्र न करने और इनसे छेड़छाड़ करने का आरोप भी पुलिस एसआईटी पर है।
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