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हिमाचल प्रदेश: पीड़िता और मां बयानों से मुकरीं, मेडिकल-फॉरेंसिक साक्ष्य भी नहीं मिले; दुष्कर्म का आरोपी बरी

Tue, 08 Sep 2026 09:52 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

शिमला की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और धमकी देने के आरोपी प्रताप राणा उर्फ रानो को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने पूर्व बयानों से मुकर गईं। वहीं मेडिकल रिपोर्ट और जुंगा फोरेंसिक लैब की जांच में भी आरोपी के खिलाफ यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई। इन परिस्थितियों में अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।
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कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नाबालिग से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में शिमला की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने आरोपी प्रताप राणा उर्फ रानो को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। पॉक्सो और दुष्कर्म मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा ने यह फैसला सुनाया।

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अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की कहानी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पीड़िता और उसकी मां अपने पूर्व बयानों से मुकर गईं। इसके अलावा मामले में पेश किए गए मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए यौन शोषण के आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके।

पढ़ाने के बहाने ले जाने का था आरोप
मामले के अनुसार, 11 अप्रैल 2026 को पीड़िता की मां ने ठियोग पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी उसकी 14 वर्षीय बेटी को पढ़ाने के बहाने अपने साथ ले गया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म तथा धमकी देने सहित संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई। मामला पॉक्सो कानून से जुड़ा होने के कारण इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक विशेष अदालत में हुई।

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अदालत में बदल गए बयान
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां ने अदालत में अपने पूर्व बयानों का समर्थन नहीं किया। दोनों के बयान अभियोजन पक्ष के मामले के अनुरूप नहीं रहे। अदालत ने मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की भी जांच की। इसमें मेडिकल रिपोर्ट और जुंगा फोरेंसिक लैब से प्राप्त जांच रिपोर्ट को भी देखा गया। अदालत के अनुसार, इन साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ लगाए गए यौन शोषण के आरोप की पुष्टि नहीं हुई।

साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को राहत
पीड़िता और उसकी मां के बयानों से मुकरने तथा मामले में आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका। इन परिस्थितियों को देखते हुए फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने प्रताप राणा उर्फ रानो को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत का यह फैसला मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाही के आधार पर आया है।
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