सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व में हिमाचल में रही कांग्रेस सरकारों ने इस बार नहीं अगली बार की नीति पर काम किया। यही कारण रहा कि राजधानी शिमला के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि इस बार के जलसंकट की बात करें तो उनकी सरकार को सत्ता मेें आए हुए अभी थोड़ा ही अरसा हुआ है, मगर ढांचा वही पुराने वाला ही है। इससे पहले नगर निगम शिमला की कमान भी भाजपा के हाथ में नहीं थी।
इसलिए मौजूदा जलसंकट के लिए पूर्व की कांग्रेस सरकार और नगर निगम शिमला की पुरानी व्यवस्था ही जिम्मेदार है। अतीत में भी जाएं तो मई और जून के महीनों में पिछली सरकारों में जलसंकट रहा है।
वर्ष 2015 में 36 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती थी। वर्ष 2016 और 2017 में भी 34 और 35 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हुई। इस बार तो सूखे के कारण शिमला को 22 एमएलडी से भी कम पानी मिल पाया।
पूर्व सरकार के बिगाड़े ढांचे के कारण इस बार 25 फीसदी तो लीकेज रहा। उन्होंने कहा कि कोल डैम परियोजना के अलावा शिमला के लिए पानी पहुंचाने को अन्य जलस्रोतों को दुरुस्त और विकसित करने की दिशा में भी कडे़ प्रयास किए जा रहे हैं। ।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश सरकार के खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में एक्साइज ड्यूटी इकट्ठा न करने से महज एक साल में ही 160 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कैबिनेट ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। जल्दी ही इससे संबंधित तथ्य सामने लाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि शिमला में जलसंकट पर उन्होंने दिल्ली जाकर पीएमओ में भी बात की है। वहां से केंद्रीय जल आयोग की टीम शिमला भेजी गई।
इस टीम ने पिछले दिन शिमला के आसपास पानी के भंडारों और योजनाओं की स्थिति का मुआयना किया। हमने केंद्र से मौजूदा संकट को देखते हुए 200 करोड़ मांगे हैं। केंद्र इसे जारी कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश सरकार के खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में एक्साइज ड्यूटी इकट्ठा न करने से महज एक साल में ही 160 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कैबिनेट ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। जल्दी ही इससे संबंधित तथ्य सामने लाए जाएंगे।