एक मां चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है उठो मेरी बेटी .. उठो। बच्ची की मौत चुकी है। लेकिन मां को अभी भी उम्मीद थी बेटी जिंदा है तथा उसके पुकारने पर उठ खड़ी होगी।
बदहवाश हो चुकी मां आसपास से गुजर रहे लोगों को पकड़-पकड़कर कहती रही मेरी बेटी को उठाओ। मां के शब्द, डॉक्टर साहब मेरी बेटी को पीजीआई शिफ्ट करो वहां अच्छा इलाज मिलेगा। लेकिन डॉक्टरों की भी हिम्मत न हुई कि वह सीधे कह दें कि मेहल अब दुनिया छोड़ चुकी है।
मां के इन शब्दों को सुनकर कई डॉक्टर भी रुआंसे हो गए। मां की इन दर्दनाक चीखों से वार्ड में दाखिल हर मरीज की आंखों में आंसू थे। मेहल चेल्सी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती थी तथा वह भी उसी अभागी बस में सवार थी जो लोअर खलीनी में दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।
आईजीएमसी में इससे पहले सात मिनट के भीतर एक के बाद एक लगातार दो निजी गाड़ियां और एक एंबुलेंस अस्पताल में प्रवेश करती है। 8:02 बजे पहली गाड़ी से एचआरटीसी बस चालक समेत चार छात्राओं को निकाला और अफरातफरी में इमरजेंसी वार्ड में उपचार के लिए ले गए।
तीन मिनट बाद दूसरी गाड़ी पहुंचती है, इसमें तीन छात्राएं थी, दो मिनट बाद एंबुलेंस भी पहुंचती हैं, इसमें दो छात्राएं थी और उपचार के लिए वार्ड में ले गए। डाक्टरों की टीम पहले से ही मुस्तैद है और घायलों को उपचार दिया जा रहा है।